भोपाल। अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री, फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन और कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट (डीप डिस्काउंटिंग) के विरोध में बुधवार को मध्य प्रदेश के दवा व्यापारियों ने ऐतिहासिक हड़ताल की। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर प्रदेश भर के करीब 41 हजार से अधिक रिटेल और थोक मेडिकल स्टोर्स पूरी तरह बंद रहे। राजधानी भोपाल में ही 3 हजार से ज्यादा दुकानों पर ताले लटके नजर आए। सुबह से ही थोक दवा बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा, जहां आक्रोशित दवा व्यापारियों ने एकत्रित होकर न केवल जमकर नारेबाजी की, बल्कि ‘ऑनलाइन सिस्टम’ का पुतला दहन भी किया।
इस सांकेतिक बंद को ग्वालियर के 2200, मैहर-अमरपाटन के 567 और पांढुर्णा के 150 से अधिक स्टोर्स सहित जबलपुर, झाबुआ, शाजापुर, खंडवा, देवास और गुना जैसे तमाम जिलों के केमिस्ट एसोसिएशनों का शत-प्रतिशत समर्थन मिला। भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ और खंडवा एसोसिएशन के अध्यक्ष गोवर्धन गोलानी ने संयुक्त रूप से बताया कि मौजूदा ड्रग एक्ट में ऑनलाइन दवा बेचने का कहीं भी उल्लेख नहीं है। कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने लॉकडाउन में लोगों तक जरूरी दवाइयां पहुंचाने के लिए ई-फार्मेसी को आवश्यक सेवा का दर्जा देकर अस्थाई रूप से कुछ रियायतें दी थीं, जिसमें व्हाट्सएप या ईमेल के डिजिटल पर्चे को मान्य किया गया था। लेकिन अब इसी ढील का फायदा उठाकर बड़ी कंपनियां नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं।
केमिस्टों का आरोप है कि इस अवैध ऑनलाइन व्यापार के कारण परंपरागत दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट तो खड़ा हुआ ही है, साथ ही बिना डॉक्टर के वास्तविक पर्चे के गर्भपात और कई तरह की घातक नशीली दवाएं ऑनलाइन आसानी से घर-घर पहुंच रही हैं, जिससे दवाओं की गुणवत्ता, मॉनिटरिंग और युवाओं में इसके दुरुपयोग का बड़ा जोखिम पैदा हो गया है।
