भोपाल। राजधानी के बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी 10 लेन अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से हरी झंडी मिलते ही जमीनी स्तर पर हलचल तेज हो गई है। एनजीटी की दिल्ली बेंच से पर्यावरणीय शर्तों के साथ अनुमति का आदेश मिलते ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने ठेकेदार के माध्यम से विवादित कॉरिडोर में पेड़ों की कटाई का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है।
शुक्रवार को रत्नागिरि तिराहे से आसाराम तिराहे तक सड़क किनारे कम से कम चार बड़ी अत्याधुनिक मशीनों की मदद से सालों पुराने पेड़ों को धराशायी किया गया। काम की रफ्तार को देखते हुए स्थानीय लोगों का कहना है कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर इस पूरे ग्रीन कॉरिडोर की हरियाली पूरी तरह साफ हो सकती है। उल्लेखनीय है कि एनएचएआई द्वारा आसाराम चौराहा से रत्नागिरि तिराहे तक 16 किलोमीटर लंबे अयोध्या बायपास को सर्विस रोड सहित 10 लेन में बदलने के लिए ₹836.91 करोड़ का यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसके तहत कुल 7,871 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, जिनमें से कई पेड़ 40 से 80 साल पुराने हैं। पिछले साल दिसंबर में जब महज तीन दिनों के भीतर करीब आधे पेड़ काट दिए गए थे, तब भारी जनविरोध के बाद मामला एनजीटी पहुंचा था और कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी।
अब एनजीटी द्वारा शर्तों के साथ काम को मंजूरी दे दी गई है। अनुमति मिलने के बाद बायपास पर केवल पेड़ों की कटाई ही नहीं, बल्कि निर्माण गतिविधियां भी चरम पर पहुंच गई हैं। सड़क के कई हिस्सों में बैरिकेडिंग करके मुख्य मार्ग को संकरा कर दिया गया है। रत्नागिरि तिराहे से आसाराम तिराहे के बीच लगभग हर 100 से 200 मीटर पर अचानक डायवर्जन बनाए गए हैं, जिसके चलते इस व्यस्त मार्ग से रोजाना गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को भारी ट्रैफिक जाम और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
