चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दिए गए एक बयान और ट्वीट को लेकर दायर याचिका को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री ने कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से पेश करते हुए यह गुमराह करने वाली बात फैलाई है कि अदालत ने कुत्तों को मारने की खुली छूट दे दी है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अगर मुख्यमंत्री कोई बयान देते हैं तो क्या हम अपना आदेश बदल देंगे?” जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बैंच ने याचिकाकर्ता को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है।
बेंच ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने से साफ इनकार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का जमीन पर सख्ती से पालन करवाने की जिम्मेदारी संबंधित हाईकोर्ट को सौंपी गई है, इसलिए आपको वहीं जाकर अपनी बात रखनी चाहिए। दरअसल, छह दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर अपना आखिरी ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसके बाद पंजाब के सीएम भगवंत मान ने ट्वीट कर कहा था कि वे इस आदेश का अक्षरशः पालन करेंगे और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर ऐसा संदेश दिया है जैसे सुप्रीम कोर्ट ने सभी कुत्तों को मारने की खुली छूट दे दी है।
हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 19 मई 2026 के अपने ट्वीट में स्पष्ट किया था कि प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी एक्ट और एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) के नियमों के दायरे में रहकर ही कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि केवल उन्हीं कुत्तों के खिलाफ कानून सम्मत सख्त कदम (मारना शामिल) उठाए जाएंगे जो रेबीज से संक्रमित हैं, लाइलाज हैं या मानव जीवन के लिए बेहद आक्रामक और खतरनाक हो चुके हैं। इसके अलावा आम जनता व बच्चों की सुरक्षा के लिए डॉग शेल्टर बनाने और सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाने की बात कही थी।
