चंडीगढ़। पंजाब में अब बोर्ड परीक्षाओं में समान अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की रैंकिंग डेट ऑफ बर्थ (जन्मतिथि) के आधार पर तय नहीं की जाएगी, बल्कि समान अंक हासिल करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को संयुक्त रूप से एक जैसा स्थान और बराबर सम्मान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह ऐतिहासिक और बड़ा फैसला पंजाब शिक्षा विभाग की ओर से रविवार (31 मई) को चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में आयोजित पीएसईबी (PSEB) के मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह ‘सितारे ज़मीन पर’ के दौरान लिया।
इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और पंजाब मामलों के प्रभारी मनीष सिसोदिया भी विशेष रूप से मौजूद रहे। मुख्यमंत्री जब मंच से मेधावियों के साथ संवाद कर रहे थे, तभी अमृतसर की एक छात्रा ने व्यवस्था की इस विसंगति को उठाते हुए एज डिफरेंस (उम्र के अंतर) का मुद्दा बेहद प्रखरता से उठाया।
छात्रा ने प्रश्नोत्तर सत्र में बताया कि अमृतसर जिले में आठवीं कक्षा की तीन लड़कियों ने 500 में से पूरे 500 अंक हासिल किए थे, लेकिन विभाग के पुराने नियमों के चलते जन्मतिथि के आधार पर कम उम्र वाली छात्रा को प्रथम और अधिक उम्र वाली छात्राओं को क्रमशः द्वितीय व तृतीय रैंक घोषित कर दिया गया। इस त्रुटिपूर्ण व्यवस्था के कारण केवल प्रथम स्थान पाने वाली छात्रा को ही मुख्यमंत्री से सम्मानित होने का अवसर मिल सका, जबकि बाकी दो मेधावी इस गौरव से वंचित रह गईं।
छात्रा ने तर्क दिया कि जब सभी बच्चे समान दिमाग से बराबर मेहनत करते हैं, तो जन्मतिथि के आधार पर भेदभाव कर टॉपर्स को अलग-अलग करना पूरी तरह गलत है और यदि तीनों को समान रूप से टॉपर माना जाए तो यह शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता को दर्शाएगा। छात्रा के इस आत्मविश्वास और हौसले की मनीष सिसोदिया ने जमकर सराहना करते हुए इसे शिक्षा की असली ताकत बताया।
