नई दिल्ली। केंद्र सरकार के ऑफर फॉर सेल (OFS) की शुरुआत के साथ ही देश में विनिवेश की रफ्तार एक बार फिर तेज हो गई है। वित्तीय सेवा विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, भारत सरकार 2 जून से शुरू होने वाले ओएफएस के माध्यम से एनएचपीसी (NHPC) लिमिटेड में 6% तक की हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस घोषणा के बाद से बाजार के निवेशक कंपनी के विकास की संभावनाओं और शेयरों के मूल्य में आने वाली संभावित कमी (डाइल्यूशन) की चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस शेयर बिक्री प्रक्रिया (OFS) के तहत सरकार शुरुआत में इस राज्य के स्वामित्व वाली जलविद्युत कंपनी में 3% हिस्सेदारी बेचेगी।
हालांकि, यदि निवेशकों की ओर से मजबूत मांग देखने को मिलती है, तो सरकार के पास ‘ग्रीन शू तंत्र’ (Green Shoe Option) के माध्यम से अतिरिक्त 3% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी सुरक्षित रहेगा। इस प्रकार, विकल्प का पूरी तरह से उपयोग होने पर केंद्र एनएचपीसी में अपनी कुल हिस्सेदारी का 6% हिस्सा बाजार में बेचेगा। सरकार द्वारा इस शेयर बिक्री के लिए न्यूनतम मूल्य (फ्लोर प्राइस) 71 रुपये प्रति इक्विटी शेयर निर्धारित किया गया है। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, यह ओएफएस आज यानी 2 जून से गैर-खुदरा (Non-Retail) निवेशकों के लिए खुल चुका है। वहीं, दूसरी ओर देश के खुदरा (Retail) निवेशक कल यानी 3 जून को स्टॉक एक्सचेंज तंत्र के माध्यम से इस ओएफएस में अपनी बोली लगा सकेंगे। विद्युत मंत्रालय के अधीन आने वाली एनएचपीसी एक प्रतिष्ठित नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है, जो भारत की अग्रणी जलविद्युत ऊर्जा उत्पादन कंपनियों में से एक होने के साथ-साथ अब नवीकरणीय (रिन्यूएबल) ऊर्जा क्षेत्र में भी तेजी से अपनी उपस्थिति का विस्तार कर रही है।
सरकार की यह हिस्सेदारी बिक्री उसके चल रहे राष्ट्रव्यापी विनिवेश कार्यक्रम का ही एक हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में छिपे मूल्य को अनलॉक करना और महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधनों को जुटाना है। इस लेन-देन से प्राप्त होने वाली पूरी धनराशि चालू वित्त वर्ष के लिए तय किए गए सरकारी विनिवेश लक्ष्यों में योगदान देगी। भारत के स्वच्छ ऊर्जा और जलविद्युत क्षेत्र में एनएचपीसी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, बाजार के विशेषज्ञ और प्रतिभागी इस ओएफएस पर निवेशकों की आने वाली प्रतिक्रिया पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
