भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। सरकार अब प्रदेश के गांवों के आबादी क्षेत्र में रहने वाले लाखों परिवारों को उनकी जमीन और मकान की रजिस्ट्री पूरी तरह अपने खर्च पर कराकर देगी। स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे से तैयार किए गए प्रॉपर्टी कार्ड्स (अधिकार अभिलेख) को लेकर बैंकिंग क्षेत्र में कई व्यावहारिक और कानूनी दिक्कतें आ रही थीं, जिसके कारण कई बैंक इन दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत करने से कतरा रहे थे।
इस तकनीकी और कानूनी बाधा को दूर करने के लिए कैबिनेट ने इन संपत्तियों के दस्तावेजों का सरकारी खर्च पर पंजीयन (रजिस्ट्री) कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद ग्रामीणों को बैंक से कृषि, व्यापार, स्वरोजगार या अन्य निजी आवश्यकताओं के लिए आसानी से लोन मिल सकेगा और गांवों के मकान व जमीन पहली बार औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से सीधे जुड़ सकेंगे। इस महत्वाकांक्षी निर्णय के तहत ग्रामीणों को रजिस्ट्री कराने के लिए अपनी जेब से एक भी पैसा नहीं देना होगा। सरकार हितग्राहियों से पंजीयन के समय किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लेगी, बल्कि स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क में भी पूरी राहत देने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।
सरकार का अनुमान है कि अधिकार अभिलेखों के इस व्यापक पंजीयन कार्य पर करीब 3,800 करोड़ रुपए का वित्तीय भार आएगा, जिसे पूरी तरह राज्य शासन वहन करेगा। इसके साथ ही योजना के लाभ और इस नई व्यवस्था की जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार ने व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का भी निर्णय लिया है। इसके लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रुपए तक और आवश्यकता पड़ने पर प्रत्येक जिले के लिए 2.5 करोड़ रुपये तक की राशि खर्च की जा सकेगी।
