नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की गिरती वित्तीय स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन दोनों महारत्न कंपनियों को एक साल का नोटिस जारी करते हुए अपने प्रदर्शन में सुधार करने की चेतावनी दी है। यदि अगले एक वर्ष के भीतर इनके मुनाफे में सुधार नहीं होता है, तो इन्हें ‘महारत्न’ से घटाकर ‘नवरत्न’ श्रेणी में डाला जा सकता है।
जानकारों का कहना है कि भेल और सेल पिछले तीन वर्षों के दौरान ₹5,000 करोड़ से अधिक के औसत वार्षिक शुद्ध लाभ (PAT) के अनिवार्य मानदंड को पूरा करने में विफल रही हैं। देश की कुल 14 महारत्न कंपनियों में से केवल ये दो कंपनियां ही आवश्यक वित्तीय मानकों पर खरी नहीं उतरीं। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता वाली समिति ने यह सिफारिश की है कि यदि कंपनियां निर्धारित मानदंडों से भटकती हैं, तो उनके ‘रत्न’ दर्जे की समीक्षा की जानी चाहिए। यदि इनका दर्जा घटता है, तो इनके बोर्ड की स्वायत्तता कम हो जाएगी।
महारत्न कंपनियां बिना सरकारी मंजूरी के 5,000 करोड़ तक का निवेश कर सकती हैं, जबकि नवरत्न के लिए यह सीमा मात्र 1,000 करोड़ है। नीति आयोग ने भेल की एचआर नीतियों को इसकी प्रगति में बड़ी बाधा बताया है, वहीं सेल के मामले में भारी टर्नओवर के बावजूद कम मुनाफे पर चिंता जताई गई है। भारी उद्योग और इस्पात मंत्रालयों को इन कंपनियों के लिए ‘टर्नअराउंड प्लान’ पेश करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही, सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) अब महारत्न और नवरत्न दर्जे के लिए पात्रता मानदंडों को 2025 की कीमतों के आधार पर संशोधित करने की तैयारी कर रहा है, जिससे आने वाले समय में पीएसयू के लिए इन मानकों को बनाए रखना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
