भोपाल। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) भोपाल में मान्यता प्राप्त यूनियन के आगामी चुनाव मई या जून 2027 में होना संभावित हैं। नए श्रम कानून के लागू होने के बाद अब इन चुनावों में किसी भी यूनियन को मान्यता प्राप्त करने के लिए कम से कम 20 प्रतिशत वोट प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इस नए नियम के कारण भोपाल यूनिट में मान्यता प्राप्त यूनियन के लिए सीटों की संख्या 5 से घटकर 3 या 4 हो सकती है, क्योंकि यहाँ कर्मचारियों की कुल संख्या ढाई हजार से भी कम रह गई है।
सबसे बड़ी बात यह है कि पिछले चुनाव में भेल की किसी भी यूनियन को 20 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल नहीं हुए थे। ऐसे में यदि इस बार भी किसी यूनियन को 20 प्रतिशत वोट नहीं मिलते हैं, तो भोपाल का ज्वाइंट कमेटी में प्रतिनिधित्व पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा या फिर केंद्रीय लीडर के भरोसे रहना पड़ेगा। इस नए संकट को देखते हुए भेल की प्रमुख यूनियनों में हलचल तेज हो गई है। जहाँ बीएमएस ने 20 प्रतिशत से ज्यादा वोट पाने के लिए नई कार्यकारिणी का गठन कर तैयारी शुरू कर दी है, वहीं ऐबू यूनियन ने प्रबंधन को पत्र सौंपकर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की सबसे पहले मांग की है। दूसरी ओर, एचएमएस केटीयू और यूएमएस के भरोसे 20 प्रतिशत वोट की उम्मीद लगाए हुए है, जबकि सीटू आंदोलन को लेकर रणनीति बनाने में जुटी है।
इंटक भी खुद को कर्मचारियों के सबसे नजदीक मानकर पूरे जोर-शोर से मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। जानकारों के अनुसार, इस बार मुकाबला बेहद कांटे का होने वाला है, क्योंकि जिन यूनियनों के पास पहले 18 या 19 प्रतिशत वोट थे, उन्हें मान्यता बचाने के लिए हर हाल में 20 प्रतिशत का आंकड़ा पार करना होगा। फिलहाल जमीन पर एक-दो यूनियनों के अलावा बाकी में वैसी सक्रियता नहीं दिख रही है, और आने वाला समय ही बताएगा कि चुनाव के वक्त कौन सी यूनियन बाजी मारती है।
