भेल भोपाल के कुछ यूनियन नेताओं की जितनी तारीफ की जाये कम है । वह जब चाहे दल बदल लेते हैं और जब चाहे राजनीति । इसकी चर्चाऐं भेल भोपाल कारखाने में शुरू हो गई है। दरअसल एक बड़ी यूनियन के बड़े ओहदे पर बैठे यह नेता जी अब नेशनल फ्रंट आफ इंडियन ट्रेड यूनियन निफ्टू के प्रदेश अध्यक्ष या राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने की तैयारी कर रहे हैं । चर्चा है कि इन्हें आफर भी मिल गया है । बड़ी बात यह है कि आखिर यह एक बड़ी यूनियन में बड़े ओहदे पर रहते हुये स्वयंशंभू नेता बने हुये थे । ऐसी स्थित में इन्हें इस यूनियन से इन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया । नेता जी के समझ में यह नहीं आ रहा था कि आखिर वह करें तो क्या करें तो उन्होंने नई यूनियन में शामिल होने का मन बना लिया है । नेता जी की जितनी तारीफ की जाये कम है सबसे पहले इंटक,यूनाईटेड ट्रेड यूनियन,फिर लगातार एचएमएस और फिर बीएमएस यूनियन में चले गये ।
चर्चा है कि दलबदल इनकी फितरत है । जब यह एक समय निर्दलीय पार्षद चुने गये तो कांग्रेस को समर्थन देते हुये नगर—निगम में एमआईसी मेंम्बर बन गये । यहां पूरे मजे लेने के बाद भाजपा में शामिल हो गये । हालांकि भाजपा ने इन्हें पार्षद का टिकिट दिया था लेकिन चुनाव बुरी तरह हार गये । अब वह अपने आप को भाजपा और आरएसएस का नेता बताते हैं । इनकी एक कहानी नहीं है यह भेल सहकारी उपभोक्ता भंडार में लगातार दो बार डायरेक्टर चुने गये । मजेदार बात यह है कि दोनों बार वह संस्था के मेंम्बर ही नहीं थे फिर भी यहां मजे लेते रहे । यहीं नहीं जब थ्रिफ्ट में डायरेक्टर चुने गये तो अध्यक्ष ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया । हाईकोर्ट तक लड़े वहां से भी हार का सामना करना पड़ा । अब देखना यह है कि निफ्टू में आने के बाद इस यूनियन को कितने आगे बढ़ते या फिर कितने पीछे ले जाते हैं ।
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