भोपाल। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) ने देश के ऊर्जा और बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। कंपनी ने झारखंड स्थित ‘नॉर्थ करनपुरा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट’ में एयर कूल्ड कंडेंसर (एसीसी) तकनीक से लैस भारत के पहले सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का सफल निर्माण और कमीशनिंग कार्य पूरा कर लिया है।
भेल मुख्यालय द्वारा सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से दी गई जानकारी के अनुसार, इस परियोजना की तीनों इकाइयों के पूर्ण रूप से चालू होने के साथ ही भारत ने सतत और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। इस संयंत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसमें इस्तेमाल की गई अत्याधुनिक एयर कूल्ड कंडेंसर तकनीक है। पारंपरिक ताप विद्युत संयंत्रों (थर्मल पावर प्लांट्स) में बिजली उत्पादन के दौरान बड़े पैमाने पर पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन इस नई तकनीक के उपयोग से पानी की खपत घटकर लगभग एक-तिहाई (सिर्फ 33%) रह जाएगी। पर्यावरण विशेषज्ञों और इंजीनियरों के अनुसार, यह तकनीक देश के उन हिस्सों या जल-संकट वाले क्षेत्रों में बिजली उत्पादन को निरंतर बनाए रखने के लिए बेहद टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल साबित होगी, जहाँ पानी की भारी किल्लत रहती है।
इससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा, बल्कि निर्बाध बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा सकेगी। भेल प्रबंधन ने इस बड़ी सफलता को देश के विकास मॉडल के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है। कंपनी के अनुसार, यह परियोजना देश की तेजी से बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ ‘विकसित भारत’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के राष्ट्रीय लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा योगदान है। अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और इंजीनियरिंग कौशल के बल पर BHEL भारतीय ऊर्जा क्षेत्र को अधिक हरित (Green), भविष्य के लिए तैयार (Future-Ready) और टिकाऊ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस संयंत्र के पूरी क्षमता से शुरू होने पर देश के पावर ग्रिड को भारी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
