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Sunday, June 14, 2026
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बेहतर ईलाज का भरोसा दिलाकर सोनागिरी के बीमा अस्पताल को 3 साल पहले सुपर स्पेशलिस्ट तो बना दिया लेकिन सुविधाऐं नदारद

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भोपाल और मंडीदीप के 4 लाख बीमित परिवार कराता है

भोपाल। केंद्र सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के नुमाइंदों की बेरुखी के चलते भेल के सोनागिरी राज्य कर्मचारी बीमा अस्पताल का हाल बदहाल है। न तो यहाँ कोई सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं और न ही मरीजों की जांच के लिए बेहतर मशीनें उपलब्ध हैं। साफ जाहिर है कि यहाँ का श्रमिक वर्ग इलाज कराने के बजाय दूसरे चिकित्सालयों के बाहर रेफर होने को मजबूर है। इंदौर की तर्ज पर इस अस्पताल को सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल बनानें की घोषणा तो कर दी लेकिन ईलाज लेकिन इस अस्पताल में पुरानी एक्स—रे मशीन से काम चलाया जा रहा है सोनोग्राफी मशीन ठीक से काम नहीं कर रही है। वहीं पैथोलॉजी की जांच पूरी तरह नहीं होती है । बड़ी बात यह है कि सेकेड्ररी केयर बंद होने से मरीजों का एम्स व हमीदिया अस्पताल भेजा जा रहा है । उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।

इस अस्पताल को केन्द्र सरकार के अधीन कर सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल को दर्जा तो दे दिया लेकिन 3 साल बाद भी इसमें कहीं सुधार दिखाई नहीं दे रहा है । ईएसआईसी के वरिष्ठ अधिकारी शिकायत करने के बाद भी आंखें बंद किये हुये हैं। श्रमिक नेता तोरन सिंह का कहना है कि इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार शिकायत की है लेकिन आज तक ध्यान नहीं दिया जा रहा है । सुविधाओं के अभाव में मरीज परेशान हैं । ऐसा भी नहीं कि सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल बनानें में प्रदेश सरकार की राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर जी अहम भूमिका न रही हो लेकिन 3 साल गुजर जाने के बाद भी उन्होंने इस अस्पताल की हालत देखने की जरूरत ही नहीं समझी । इसके चलते बीमित कर्मचारियों में काफी निराशा का माहोल देखा जा रहा है ।

टेकओवर के बाद बीमा अस्पताल पर संकट

सोनागिरी के कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआईसी) अस्पताल इस समय बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। अस्पताल का संचालन राज्य शासन (कर्मचारी राज्य बीमा सेवा) से केंद्र सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम के हाथों में सौंपे जाने (टेकओवर) के बाद यहाँ पदस्थ राज्य सेवा के अधिकांश डॉक्टरों और स्टाफ ने डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर काम करने से साफ इनकार कर दिया है। यदि यह स्टाफ एक साथ हटता है, तो अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा जाएंगी। मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने इस अस्पताल को टेकओवर किया है। नई व्यवस्था के तहत केंद्र के अफसरों को पुराने डॉक्टरों और स्टाफ को डेपुटेशन के आधार पर दो साल के लिए चिकित्सा कार्य पर रखना था। केवल 40 डॉक्टर व कर्मचारी बचे हैं अस्पताल में पहले से ही स्टाफ की भारी कमी है। कर्मचारी नेता श्यामलाल का कहना है कि इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है

 

प्रतिनियुक्ति के लिए सहमति नहीं देने वाले डॉक्टरों व स्टाफ का होगा तबादला

राज्य सेवा (कर्मचारी राज्य बीमा सेवा) द्वारा संचालित बीमा अस्पताल को केंद्र सरकार (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) ने टेकओवर कर लिया है। ऐसे में अस्पताल में पदस्थ राज्य सेवा के जो डॉक्टर व स्टाफ केंद्र के अधीन डेप्युटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर काम करने के लिए सहमति पत्र (कंसेंट फॉर्म) नहीं भरेंगे, उन्हें कर्मचारी राज्य बीमा सेवा की ग्वालियर सहित प्रदेश भर में संचालित डिस्पेंसरियों में ट्रांसफर किया जाएगा।

 

राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने ईएसआईसी को की शिकायत

मप्र राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने भोपाल के सोनागिरी स्थित ईएसआईसी अस्पताल में कार्यरत अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और उपलब्धियों के संरक्षण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) नई दिल्ली के महानिदेशक और इंदौर के उपनिदेशक को पत्र जारी कर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने तथा 7 दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, आवेदक श्यामलाल खोकर सहित अन्य कर्मचारियों— हरिकिशन रामशिरस, कमलेश कुमार लोटर, महेन्द्र कुमार चौधरी, शंकरस्त उपनरे, मनोज गौर, किशोर बरतार और कल्याणु पाल—ने आयोग के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई थी। आवेदकों ने कर्मचारी राज्य बीमा परिषद सोनागिरी (भोपाल) अस्पताल में कार्यरत अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों की स्थायी संवैधानिक सेवा सुरक्षा एवं उपलब्धियों के संरक्षण का मुद्दा उठाया था। आयोग के सदस्य बारेलाल अहिरवार ने पत्र जारी किया है।

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