यूनियन नेताओं की आपसी लड़ाई का शिकार हो रहे कर्मचारी
भोपाल
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (भेल) भोपाल यूनिट में इन दिनों कुछ यूनियन नेताओं की आपसी लड़ाई का खामियाजा भेल के कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा एक नहीं कई बार हो चुका है। इसको लेकर कुछ टे्रड यूनियनों ने एकजुट होकर विरोध करने का मन बना रही है। मामला कारखाने के एक भेल कर्मचारी रोहित कुमार का है। यह कभी एक अन्य यूनियन में पदाधिकारी थे। जब तक इस यूनियन में रहे उन्होंने जमकर काम किया लेकिन जैसे ही अपनी ही यूनियन के पदाधिकारियों से मनमुटाव हुआ तो उन्होंने आल इंडिया भेल कर्मचारी यूनियन का दामन थाम लिया।
बस यही बात उनकी पहली यूनियन के पदाधिकारी को रास नहीं आई। इसको लेकर रोहित कुमार को एक मामले में सस्पेंड कराया लेकिन इस मामले को लेकर स्थानीय प्रबंधन ने जांच पूरी होने ेके पूर्व ही उन्हें बहाल कर दिया। ये बात भी उस यूनियन को पसंद नहीं आई। तो उन्होंने दिल्ली दरबार मेें पूरी ताकत झोंककर उनका तबादला साउथ की रानीपेट यूनिट में करा दिया। न स्थानीय प्रबंधन की चली न एबू यूनियन की।
दोस्ती दुश्मनी में बदल गई
जब रोहित कुमार अपनी पुरानी यूनियन में थे तो उन्हें उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, महासंघ के उपाध्यक्ष भेल के प्लांट काउंसिल और केंद्रीय जेसीएम के प्रतिनिधित्व का दायित्व भी सौंपा गया था। लेकिन जैसे ही उन्होंने इस यूनियन को छोड़ा और आल इंडिया भेल एम्पलाईज यूनियन का दामन थामा तब से उन पर कहर टूट पड़ा। दरअसल एबू यूनियन में एक नहीं दो नेता पहुंच गए। वे भी कट्टर दुश्मन इसीलिए ये दोनों नेता अपनी पुरानी यूनियन की नजर में है।
अब अन्य यूनियन हो रही हैं लामबंद
जानकारों के मानें तो कर्मचारी विरोधी इस रवैये के खिलाफ भेल की कुछ यूनियन लामबंद हो रही हैें। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों का भारी नुकसान हो सकता है। अब देखना यह है कि ये लामबंद होकर एक यूनियन के खिलाफ कैसी लड़ाई लड़ते है।
कर्मचारी विरोधी रवैये के चलते एक यूनियन को उठाना पड़ा नुकसान
भेल में एक यूनियन ऐसी भी है कि जो पिछले कुछ सालों से अपनी ही यूनियन के कुछ कर्मचारियों को अपने पावर के चलते परेशान कर रही थी। किसी का डिमोशन तो किसी का ट्रांसफर तो किसी को प्रमोशन रोकना उसके लिए मामूली बात थी। यही कारण रहा कि जब प्रतिनिधि यूनियन के चुनाव हुए तो ऐसे नाराज कर्मचारियों ने एक अन्य यूनियन का दामन थाम लिया और चुनाव लड़ा। इससे बड़ा नुकसान यह हुआ कि इन कर्मचारियों के यूनियन तो चुनाव जीत गई। लेकिन जिसने इन कर्मचारियों को नुकसान पहुंचाया था वे हार गए। आज कल भेल में कर्मचारी विरोधी यूनियन को नुकसान पहुंंचाने का काम खुद कर्मचारी कर रहे है। लेकिन फिर भी ऐसी यूनियनें समझने का काम नहीं कर रही है।
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कस्तूरबा में जलपान गृह फिर से शुरू
भोपाल। बीएचईएल लेडीज क्लब द्वार कमला नेहरू बाल उद्यान में टॉय ट्रेन का शुभारंभ किया गया था। हाल ही में उद्यान में वाटिका जलपान-गृह का पुन: शुरू किया गया है। यहां पर गुणवत्ता एवं सफाई का विशेष ध्यान रखा गया है। यह वाटिका शाम 04 बजे से रात्रि 07:30 बजे तक खुली रहेगी लेेकिन हर मंगलवार अवकाश रहेगा।
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संयुक्त ट्रेड यूनियन ने बांटा बुलेटिन
भोपाल। भेल संघर्षशील संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के नेता डीके झारिया ने सोमवार को बुलेटिन निकाला। साथ ही एक गेट मीटिंग का भी आयोजन किया । इस मौके पर श्री झारिया ने कहा कि प्रबंधन और प्रतिनिधि यूनियनें अभी तक कर्मचारियों की मंागों को पूरा करने में नाकाम साबित हुई है। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। मीटिंग में भेलू यूनियन एससी, एसटी और ओबीसी यूनियन के नेता भी शमिल हुए।
