— बीएचईएल इंम्प्लाईज को आपरेटिव सोसायटी को पता ही नहीं कब छीन ली लेबर सप्लाई
— दो ट्रेड यूनियन नेताओं के सोसायटी को एचआर और सीएनसी विभाग खुश करने में लगा
— इंम्प्लाईज को आपरेटिव सोसायटी की आर्थिक स्थिति बिगड़ी
— जीएसटी, पीएफ और ईएसआई की पेनाल्टी भी भुगतनी पड़ रही हैं संस्था को
— ईडी से गुहार, लेकिन सीएनसी की दादागिरी जारी कोई सुनवाई नहीं
भोपाल
बीएएचईएल प्रबंधन ने वर्ष 1960 में बीएचईएल के कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने और अन्य आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए बीएचई इंम्प्लाइज को आपरेटिव सोसायटी की स्थापना की थी। शुरू में तो चूंकि बीएचईएल के महाप्रबंधक मानव संसाधन इस संस्था के अध्यक्ष होते थे तब तक तो ठीक ठाक चली, लेकिन बाद में अध्यक्ष का पद खत्म करने के बाद यह संस्था धीरे धीरे कमजोर होती चली गई। एक साजिश के तहत एचआर और सीएलसी विभाग ने इसे बंद कराने का मन बना लिया।
करीब दस माह से 481 श्रमिकों की सप्लाई पहले तो खुद के हाथ में ले ली फिर इनका वेतन भुगतान भी खुद करने लगा जो नियम के विरूद्ध हैं। देर आए दुरुस्त आए की तर्ज पर इस विभाग ने बर्बादी की कील ठोकना शुरू कर दी। पहले इस संस्था को बीएचईएल से खाद्य सामग्री की सप्लाई केंटीन और गेस्ट हाउस का काम धीरे—धीरे देना बंद कर दिया। यहां तक कि वेतन, जीएसटी, पीएफ का भुगतान भी बंद कर दिया। सारे नियमों को ताक पर रखकर वेतन भुगतान भी खुद शुरू कर दिया। यानि यह 481 श्रमिक सीधे भेल के श्रमिक बन गए।
दस माह से संस्था को कमीशन तक नहीं दिया। यहां तक कि जीएसटी की पैनाल्टी भी संस्था को भुगतना पड़ रही हे। वर्तमान में यह पैनाल्टी 38 लाख बताई जा रही है। इसी के चलते संस्था के पूर्व अध्यक्ष ने भी इस्तीफा दे डाला। एक साजिश के चलते दो ट्रेड यूनियनों से जुड़ी लेबर सप्लाई करने वाली सोसायटियों को आधी—आधी लेबर सप्लाई गुपचुप तरीके से दे डाली। बीएचई एम्प्लाईज सोसायटी को पता ही नहीं यह लेबर कब अपने चहेते को दे डाली। बड़ी बात यह है कि इस सोसायटी में 30 साल से काम कर रहे करीब 30 कर्मचारियों का भविष्य भी अंधकार में हो गया।
बल्कि यह कहा जाए धीरे—धीरे एचआर और सीएलसी विभाग मिलकर उन कर्मचारियों को अपने चहेतों को देने की तैयारी कर रहा है। हद तो तब पार हो गई जब 581 श्रमिकों से 200—200 रुपए नकद भुगतान कर सीएलसी के इशारे पर फार्म तक भरवा डाले जिससे कि यह साबित हो सके कि दूसरी सोसायटियों में वे अपनी मर्जी से जा रहे हैं। इतना बड़ा खेल चलता रहा और बीएचई एम्प्लाइज को—आपरेटिव सोसायटी बर्बादी की कगार पर आकर खड़ी हो गई। इसके पीछे बीएचईएल के एचआर—सीएलसी का क्या लाभ—शुभ छिपा है, यह तो निष्पक्ष जांच के बाद ही पता चल पाएगा।
इनका कहना है—
एक साजिश के तहत बीएचई एम्प्लाइज को—आपरेटिव सोसायटी को बंद करने की तैयारी बीएचईएल के एचआर और सीएलसी विभाग ने शुरू कर दी है। इसके लिए कई बार इस विभाग को शिकायत भी की है, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। एक एजीएम ने सारी हदें पार कर दीं इसलिए बुधवार को बीएचईएल के मुखिया से मुलाकात हुई है। उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग वह निर्देशित कर बीएचईएल के नियमित कर्मचारियों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ी संस्था को बचाने की कोशिश करेंगे।
आरएस ठाकुर, अध्यक्ष, बीएचई एम्प्लाइज को—आपरेटिव सोसायटी
