भोपाल
भेल के नेता अपनी यूनियनों के माध्यम से प्रतिनिधि यूनियन के चुनाव तो जीत गये और इस चुनाव में कर्मचारियों से यह भी वादा कर बैठे की पीपीपी, एसआईपी बोनस, इन्सेंटिव एवं टी-3 जैसे मुद्दों को चुनाव जीतते ही तीन माह के भीतर हल करायेंगे लेकिन पिछले 6 माह में वह कर्मचारियों के मुद्दे तो हल नहीं करा पाये सिर्फ मानव संसाधन,ईडी,डायरेक्टर एचआर और चेयरमेन तक ज्ञापन सौपते फोटो खिचवाते ही नजर आये । ऐसे में कर्मचरियों की नाराजगी तो जायज है पर नेताओं के लिये यह वादे गले की हड्डी साबित हो रहे हैं ।
जिन डायरेक्टर पॉवर व मानव संसाधन को पिछल 6 माह में 6 बार ज्ञापन सौप चुके प्रतिनिधि यूनियन के नेताओं ने उनके भोपाल आगमन पर भी गेस्ट हाउस पहुंच कर भी एक बार फिर ज्ञापन दे डाला । इसी कड़ी में इंटक, हेवू बीएमएम,एचएमएस और ऐबू यूनियनों के प्रतिनिधि मंडल ने अलग-अलग समय लेकर इसी मुद्दे को डायरेक्टर श्री मठारू के सामने पेश किया ।
ऐसे में श्री मठारू साहब को फिर से इन मांगों को पूरा करने का भरोसा दिलाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था । खबर है कि अब कुछ यूनियनें आर-पार की लड़ाई का मूड बना चुकी हैं इसके पीछे कारण साफ है कि कर्मचारियों के इन मुद्दों को दिल्ली में होने वाली ज्वाइंट कमेटी की बैठक की विषय सूची में शामिल ही नहीं किया गया है । साफ जाहिर है कि उत्पादन के पीक पीरियेड में प्रबंधन-प्रतिनिधि यूनियन के बीच टकराव देखा जा सकता है ।
