90 के दशक के रिटायर कर्मियों को ‘इन्वर्स सिस्टम’ से अधिक सहायता देने की मांग, प्रबंधन ने दिया मदद का भरोसा
भोपाल। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) की विभिन्न इकाइयों द्वारा इस वित्तीय वर्ष के उत्पादन लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करने के बीच, संस्थान के पुराने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कल्याण का मुद्दा भी अब चर्चा में आ गया है। भोपाल से गए एक प्रतिनिधिमंडल ने भेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) से मुलाकात कर एक ज्ञापन पत्र सौंपा। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से 90 के दशक में सेवानिवृत्त हुए उन कर्मचारियों की समस्याओं को उठाया गया है, जो आज के समय में गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल में जेपी गौड़, पूर्व पार्षद अशोक शर्मा, महेश मालवीय, एनआर शर्मा, विनोद अग्रवाल और एससी निगम शामिल थे। उन्होंने सीएमडी को अवगत कराया कि 90 के दशक में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को उस समय ग्रेच्युटी और फंड के रूप में बहुत कम राशि प्राप्त हुई थी। चूंकि भेल में पेंशन योजना 2007 के बाद लागू हुई है, इसलिए ये कर्मचारी उस लाभ से वंचित हैं। साथ ही, इनमें से अधिकांश ईपीएफओ (EPFO) के सदस्य भी नहीं हैं, जिससे उन्हें मिलने वाली नाममात्र की पेंशन (500 से 1000 रुपए) में जीवन यापन करना कठिन हो गया है।
ज्ञापन के माध्यम से कहा गया है कि भेल द्वारा ‘रिटायर्ड एम्प्लॉइज कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम’ (RECH) में पंजीकृत सदस्यों को प्रतिवर्ष मई माह में सीएसआर के तहत दी जाने वाली सहायता राशि में ‘इन्वर्सली प्रोपोर्शनल सिस्टम’ (जो पहले रिटायर हुआ उसे अधिक सहायता) लागू किया जाए। वर्तमान में यह राशि लगभग 2000 रुपए दी जा रही है, जिसे पूर्व की भांति 10,000 रुपए तक बढ़ाने और पुराने कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की अपील की गई है।
अत्यंत व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने प्रतिनिधिमंडल की बात को गंभीरता से सुना। उन्होंने इस ज्ञापन को स्वीकार करते हुए आश्वस्त किया कि संस्थान अपने पुराने और निष्ठावान कर्मचारियों की समस्याओं को समझता है और इस दिशा में उचित मदद करने का प्रयास करेगा। इस सकारात्मक रुख के बाद अब हजारों पुराने सेवानिवृत्त कर्मचारियों में राहत की उम्मीद जगी है।
