नई दिल्ली/कलपक्कम। भारत ने अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम में एक स्वर्णिम अध्याय लिखते हुए कलपक्कम स्थित 500 मेगावाट (MWe) क्षमता वाले स्वदेशी ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (PFBR) की पहली क्रिटिकलिटी (संचालन की प्रारंभिक अवस्था) सफलतापूर्वक हासिल कर ली है। यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करती है जिनके पास उन्नत परमाणु तकनीक उपलब्ध है। इस मील के पत्थर को हासिल करने में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) ने एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में बड़ी भूमिका निभाई है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को नई मजबूती प्रदान करता है।
भेल ने इस जटिल परमाणु परियोजना के प्राथमिक और माध्यमिक, दोनों ही क्षेत्रों में अपनी इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का लोहा मनवाया है। रिएक्टर के ‘प्राइमरी साइड’ पर कंपनी ने इनर वेसल और थर्मल बैफल के निर्माण और आपूर्ति के साथ-साथ स्टीम जनरेटर-इवपोरेटर और मेन वेसल की तकनीक विकसित करने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। वहीं, ‘सेकेंडरी साइड’ पर भेल द्वारा पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से निर्मित 500 मेगावाट के मेन प्लांट टर्बाइन जनरेटर पैकेज की आपूर्ति और स्थापना की गई है। यह उपलब्धि न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक भारत के त्रि-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो यूरेनियम के अधिकतम उपयोग और दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करेगा। भारी उद्योग मंत्रालय के मार्गदर्शन में भेल की यह सफलता देश के परमाणु क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक भागीदारी के एक नए युग की शुरुआत है। इस ऐतिहासिक क्षण पर मंत्रालय और वैज्ञानिकों ने इसे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय बताया है, जो आने वाले समय में स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।
कलपक्कम रिएक्टर कैसे भारत को सुपर पावर बनाएगा
पीएफबीआर अपनी खपत से अधिक ईंधन (प्लूटोनियम) पैदा करता है, जिससे यूरेनियम के आयात पर निर्भरता कम होगी। भविष्य में भारत के पास मौजूद दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार (25%) को बिजली में बदलने का रास्ता तैयार करेगा। रूस के बाद, भारत व्यावसायिक रूप से संचालित होने वाला फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के मामले में दुनिया का दूसरा देश बन गया है। यह 500 मेगावाट की क्षमता के साथ, देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा में योगदान देने में मदद करेगा। यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से भारतीय उद्योग और वैज्ञानिकों (भाविनी) द्वारा निर्मित है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ का बड़ा उदाहरण है।
कल्पक्कम परमाणु रिएक्टर क्या है ?
पीएफबीआर यानी ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ की क्षमता 500 मेगावाट है। यह लगभग 4 से 5 लाख औसत भारतीय घरों को एक साथ बिजली देने के लिए पर्याप्त है।परंपरागत परमाणु रिएक्टरों के उलट यह शीतलक के रूप में पानी का उपयोग करते हैं। यह रिएक्टर के अंदर उत्पन्न तीव्र ऊष्मा को दूर ले जाने वाले द्रव के रूप में, पीएफबीआर तरल सोडियम का परिसंचरण करता है।
लगभग 200 डिग्री सेल्सियस पर पिघली हुई अवस्था में रखा गया सोडियम धातु, पानी की तुलना में कहीं अधिक तेजी से ऊष्मा का स्थानांतरण करता है।इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह तीव्र गति से चलने वाले न्यूट्रॉन की गति को धीमा नहीं करता है। यह यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन (एमओएक्स) पर चलता है।ये यूरेनियम और प्लूटोनियम ऑक्साइड को मिलाकर बनाई गई सिरेमिक गोलियां होती हैं।
