भोपाल.
अवधपुरी वायु रॉयल एनक्लेव, ईडन गार्डन गेट बीडीए वेदवती ग्राउंड अमरावद खुर्द में ध्यान विज्ञान परमार्थ संस्थान द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन अंतरराष्ट्रीय कथाकार और समाज सुधारक आचार्य मनोज अवस्थी महाराज ने श्री राम कथा के विविध प्रसंगों को सुनाया। मां जानकी की विदाई का प्रसंग सुन श्रद्धालु भावुक हो गए। महाराज ने बताया कि हर माता-पिता बेटी की विदाई के समय सीख देती है कि अब ससुराल ही तुम्हारा घर है।
बेटी का धर्म अपने ससुराल में पति, सास और ससुर की सेवा करना है। वहीं हर माता-पिता का धर्म है कि उनके घर में आई हुई जो वधू है, उसे बेटी से अधिक प्रेम दिया जाए। अयोध्या कांड की कथा सुनाते हुए महाराज ने बताया कि आज हम सब लोगों को जरूरत है कि हम लोग अपने मां का आईना, मां का दर्पण, मां का शीशा साफ करें, जो गुरुदेव भगवान के चरण की राज से साफ होगा। भगवान श्रीराम के वन गमन का प्रसंग सुनाते हुए महाराज ने बताया कि राम जी का वन गमन कैकई माता की दुर्बुद्धि के कारण हुआ, क्योंकि उनसे सत्संग रूपी भारत दूर हो गए थे। यदि सत्संग रूपी भारत अयोध्या में होते तो राम वन नहीं जाते।
महाराज ने बताया कि हम सबके जीवन में सत्संग पास रहे तो हमारे जीवन से कभी भगवान दूर नहीं हो सकते। हमारे जीवन के अयोध्या में भगवान सदैव रहेंगे। राम जन्मभूमि के संघर्ष का वृतांत सुनाते हुए कहा कि साढ़े 500 वर्ष के संघर्ष के बाद 22 जनवरी को राम जी दिव्या मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं। यह राम जी के आस्थावान सनातनियों के लिए सबसे बड़े विजय का पर्व है। कथा रोजाना दोपहर 2 बजे से की जा रही है।
