— ऑक्सीजन प्लांट चालू करने, आईसीयू में बिजली सप्लाई के लिए यूपीएस की व्यवस्था करने, डॉक्टरों की भर्ती करने के दिए सुझाव
भोपाल।
भेल के कस्तूरबा अस्पताल के सभागार में मेडिकल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में अस्पताल में व्यवस्था सुधारने और कमियों को दूर करने, सुविधाओं का विस्तार करने जैसे मुद्दे छाए रहे। यूनियन पदाधिकारियों ने कई अहम सुझाव दिए। बैठक में प्रबंधन की ओर से महाप्रबंधक रिजवान सिद्दीकी, सीएमओ अल्पना तिवारी सहित अन्य यूनियन के प्रतनिधि भी शामिल हुए।
यूनियन की मानें तो कोविड काल में एक करोड़ से अधिक लागत से लगाए गए ऑक्सीजन प्लांट को चालू करने के संबंध में तथ्य रखे। उनका कहना था कि कर्मचारियों के मेहनत से कमाए लाभ से एक करोड़ से अधिक रुपए लगाकर ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है जो इस विपरीत परिस्थितियों में कमाए गए धन का महत्वपूर्ण भाग है, लेकिन इस प्लांट से एक यूनिट भी ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हुई है। प्रबंधन इस प्लांट में आने वाली खामियों को दूर कर उच्च क्वालिटी की मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन सुनिश्चित करे।
इसी तरह यह आम धारणा है की कोविड के उपरांत बहुत से युवाओ को साइलेंट अटैक की समस्या सहित अन्य साइड इफेक्ट देखने को आ रहे हैं। यूनियन ने प्रबंधन से मांग की है कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य को देखते हुए जरूरी टेस्ट किए जाएं। आईसीयू में विद्युत सप्लाई बाधित होने पर जनरेटर के द्वारा बिजली सप्लाई में 10 से 20 मिनट का समय लगता है। इस समस्या को देखते हुए यूपीएस की व्यवस्था की जाए। प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि दो दिन में यह कार्य कर दिया जाएगा।
इन मामलों पर भी आए सुझाव
प्रबंधन ने करोड़ों रुपए खर्च कर आईसीयू सहित इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है, लेकिन अस्पताल में डॉक्टर की भर्ती प्रक्रिया डॉक्टरों के लिए लाभदायक न होने के कारण वे ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। यूनियन ने सुझाव दिया कि प्राइवेट हॉस्पिटल की तर्ज पर विशेषज्ञ डॉक्टर को अस्पताल में एडमिट मरीजों को राउंड पर देखने के लिए बुलाया जाए। नई बिल्डिंग में एक्स-रे डिपार्टमेंट को शिफ्ट करने की कार्रवाई शीघ्र की जाए। जो भी कर्मचारी बाहर के विशेषज्ञ डाक्टर से जांच करवाते हैं और डॉक्टर से दवाई लिखवाते हैं वह दवाई हॉस्पिटल से उपलब्ध कराई जाए। गर्मी को देखते हुए डिस्पेंसरियों एवं अस्पताल में चिन्हित कुछ स्थानों पर कूलर की व्यवस्था की जाए। रेफरल लेटर पर दो डॉक्टरों के हस्ताक्षर के लिए परिजनों को भटकना पड़ता है। इसके स्थान पर व्यवस्था की जाए कि रेफरल लेटर का फॉर्म जमा करने पर उसमें हस्ताक्षर सहित संपूर्ण कार्रवाई अस्पताल प्रबंधन के द्वारा की जाए। यूनियन ने प्रबंधन को अस्पताल की समस्याओं के संबंध में जानकारी बैठक में दी है, वहीं मांग भी की है कि इसको जल्द से जल्द सुधारा जाए।
