भोपाल। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा 1 अप्रैल 2026 से लागू की गई नई एम्प्लाइज पेंशन स्कीम (ईपीएस-2026) ने नौकरीपेशा वर्ग की रिटायरमेंट प्लानिंग को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। इस नई व्यवस्था के तहत सबसे बड़ा बदलाव ‘हायर पेंशन’ के विकल्प को पूरी तरह समाप्त करना है। संबंधित धारा 11(4) को हटाए जाने के बाद अब सभी कर्मचारियों के लिए पेंशन का एक समान ढांचा लागू कर दिया गया है, जिससे पेंशन की गणना प्रक्रिया तो सरल होगी, लेकिन ज्यादा पेंशन पाने की उम्मीद रखने वाले लाखों कर्मचारियों को झटका लगा है।
नई स्कीम के तहत अब ‘प्रो-रेटा’ नियम को सख्ती से लागू किया गया है, जिसका सीधा अर्थ है- “जितनी सेवा, उतनी पेंशन”। यदि किसी कर्मचारी ने पूरी तय सेवा अवधि (जैसे 35 साल) पूरी नहीं की है, तो उसे उसी अनुपात में कम पेंशन दी जाएगी। विशेष बात यह है कि अब न्यूनतम पेंशन पर भी प्रो-रेटा नियम लागू होगा, जिससे कम समय तक नौकरी करने वालों को अब पूरी न्यूनतम पेंशन का लाभ नहीं मिल सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपये से अधिक है और वे अधिक वेतन पर अंशदान करना चाहते हैं, उन्हें अब कर्मचारी और नियोक्ता की ओर से एक साल के भीतर ‘जॉइंट विकल्प’ देना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने की स्थिति में उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। इस बदलाव के बाद अब जानकारों ने सलाह दी है कि कर्मचारी केवल ईपीएस पर निर्भर रहने के बजाय पीएफ, एनपीएस और अन्य निवेश विकल्पों पर ध्यान दें, क्योंकि भविष्य में पेंशन की राशि काफी सीमित हो सकती है।
