-एक हुये रिटायर,अगले साल होंगे 4 रिटायर,महाप्रबंधकों का टोटा
-कैसे कर पायेंगे उत्पादन पूरा,रिवाइज टारगेट हो सकता है तीन हजार से ज्यादा
-एक जीएम अमिताभ को तीन विभाग का सौंपा काम
-एक जीएम को सौंपा गुरूवार को स्विचगीयर का अतिरिक्त प्रभार
भोपाल
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड भेल कॉरर्पोरेट के आला अफसरों के जितनी तारीफ की जाये कम है । उन्होंने भेल भोपाल यूनिट को भारी भरकम 5000 करोड़ का उत्पादन लक्ष्य तो दे दिया लेकिन वित्तीय वर्ष 2022-23 के 8 माह गुजर जाने के बाद भी यह ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी की शॉप से जुड़े बेहतर परफारमेंस वाले महाप्रबंधकों को प्रोडक्शन से जुड़े ब्लॉकों में बिठा कर इस लक्ष्य को कैसे पार करेंगे । फिलहाल ऐसा न होने से कुछ ब्लॉकों में अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी एचओडी के रूप में काम संभाल रहे हैं ।
24 नवंबर को स्वचगियर विभाग के महाप्रबंधक रंजॉय चौधरी रिटायर हो गये उन्हेंंं अलविदा भी कर दिया अब दो माह बाद यानि जनवरी 2023 में फेब्रीकेशन के महाप्रबंधक रविन्द्र कुमार और हीट एक्सचेंजर विभाग के महाप्रबंधक दीपक चंद्र दास भी रिटायर हो रहे हैं । यही नहीं साल 2023 में ही दो महाप्रबंधक फीडर्स के मोती सिंह रावत व पीएजी-सीएमजी की महाप्रबंधक एमआर डिंगरोचा भी रिटायर होंगे । खास बात यह है कि डिंगरोचा को बीते गुरूवार को स्विचगीयर का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया है ।
रही बात सालों भेल की विजिलेंस की जांच में फंसे रहे सीडीसी के महाप्रबंधक अमिताभ दुबे की तो इन्हें हाइड्रो-थर्मल का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया गया है यह साहब तीन विभागों का काम संभाल रहे हैं । गौरतलब है कि पहले कारखाने में महाप्रबंधकों की संख्या 22-23 हुआ करती थी अब सिमट कर 14 रह गई है इनमें से भी 4 अगले नये साल रिटायर हो जायेंगे । इनमें राकेश सिंह ,रविन्द्र रॉय,आदिकंद बेहरा,राहुल बंसल,एस श्रीनिवास,जीपी बघेल,डॉ. अल्पना तिवारी प्रोडक् शन से जुड़े महाप्र्रबंधक नहीं हैं ।
आज कारखाने की स्थिति यह है कि प्रोडक्शन या शॉप के तीन महाप्रबंधक के सहारे ही टर्न ओवर चल रहा है इनमें टीसीबी महाप्रबंधक अविनाश चन्द्रा,ईएम के महाप्रबंधक विकास खरे और हीट एक्सचेंजर के महाप्रबंधक विकास खरे ही अपने-अपने विभागों में दम मार रहे हैं । इसके चलते कारखाने में कुछ विभागों का काम अपर महाप्रबंधक स्तर के एचओडी को सांैप दिया है । काम तो बेचारे पूरी मेहनत से कर रहे हैं प्रमोशन मिलेगा या नहीं यह तो बाद की बात है । इनमें से हाइड्रो विभाग एजीएम वीएस राव व जयदीप चटर्जी,स्विचगीयर विभाग हेमराम पटेल और एक तत्कालीन ईडी के समय से विजिलेंस जांच में घिरे रहे एचसीएम विभाग के अपर महाप्रबंधक रामभाऊ पाटिल को सौंप रखा है ।
भेल की इस यूनिट में लगातार रिटायरमेंट के चलते महाप्रबंधकों का टोटा है । ऐसे में अपर महाप्रबंधक से महाप्रबंधक पद के प्रमोशन के साक्षात्कार तो हो चुके हैं लेकिन आधे-अधूरे ऐसा कहा जा रहा है कि अभी तक साक्षात्कार का सेमीफायनल ही नहीं हुआ है तो फायनल की उम्मीद करना बेकार है । ऐसी स्थिति में यदि इनका प्रमोशन हो जाता तो कम से कम प्रोडक् शन का काम तो पूरी जवाबदारी से संभालते । इससे प्रमोशन पाने वाले अफसरों का मनोबल भी धीर-धीरे टूटता जा रहा है यानि 25 जून की प्रमोशन लिस्ट 4 माह बाद भी नहीं निकल पाई ।
इधर खबर यह भी है कि इस यूनिट को मिले 5000 करोड़ के टारगेट को कॉरर्पोरेट 3000 हजार से ज्यादा रिवाइज टारगेट कर सकता है वहीं हाइड्रो को 1200 करोड़ का टर्न ओवर दिया था आर्डर पर होल्ड होने के कारण इस विभाग से 800 करोड़ कम किया जा सकता है ऐसे में विभाग सिर्फ 300-400 करोड़ का ही काम कर पायेगा । सूत्र यह भी बताते हैं की कंपनी ने ज्यादा सामान नहीं खरीदने का फरमान जारी किया है। फिलहाल कच्चा माल खरीदने पर होल्ड है ऐसे मेें कुछ ब्लॉकों में छोटे-छोटे काम रूके हुये हैं । बड़े जॉब बनकर तैयार हैं लेकिन पूरे नहीं हो पा रहे हैं । इस हिसाब से स्थानीय व कॉरर्पोरेट प्रबंधन को लक्ष्य पाने पूरा ध्यान देना होगा तब कहीं जाकर यह यूनिट हमेशा की तरह नंबर वन की स्थिति में बनी रहेगी ।
