-15 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को बांटी खिचड़ी
भोपाल
24 अप्रैल को भेल की सेवाओं को अलविदा कह एक सांई भक्त भेल कर्मी ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिये 3700 किलो की खिचड़ी पकाई। यह आयोजन साईं मंदिर आधारशिला अवधपुरी में मंदिर संस्थापक आरके महाजन ने किया । गुरूवार को 3700 किलो खिचड़ी 2 टन वजनी लोहे की हांडी में पकाई गई । इसे पकाने में करीब 6 घंटे का समय लगा। आयोजक की माने तो इसमें 3 क्विंटल 80 किलो सब्जी, 350 किलो चावल और 60 किलो दाल का उपयोग किया गया । इसमें भेल कर्मी करीब 5 लाख खर्चा आया।
आयोजक रमेश महाजन का कहना है कि उन्होंने रिटायरमेंट के बाद 3700 किलो खिचड़ी बनाने का संकल्प लिया था जो आज पूरा हुआ । इसके लिये तमाम एक्सपर्ट खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके दुबे, भोजराज सिंह धाकड़, न.नि. एडिशनल कमिश्नर गुणवंत सेवंथकर, एनसीसी कमांडेंट योगेशकुमार सिंह, पशुपालन विभाग एडिशनल डिप्टी डायरेक्टर भगवानदास मंगलानी और एनएचडीसी महाप्रबंधक पीके सक्सेना मौजूद थे।
अफसरों के सामने खिचड़ी इसकी प्रमाणिकता परखी गई । साथ ही विडियोग्राफी भी की गई जो कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजी जायेगी । इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश नागपुरे ने बताया कि गुरूवार की सुबह खिचड़ी पकाने का काम शुरू कर दिया गया। शाम को खिचड़ी पकने के बाद एक्सपर्ट टीम ने इसकी पूरी जांच पड़ताल की । उनका कहना है कि विडियो रिकार्डिंग के बाद इस आयोजन को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजी जाएगी। सांई मंदिर में करीब 15 हजार से ज्यादा सांई भक्तों को खिचड़ी के रूप में प्रसाद वितरण किया गया । इसको सभी ने सराहा है ।
श्री महाजन के मुताबिक खिचड़ी का भंडारा करने का मन पहले ही बना लिया था। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा खिचड़ी पकाने के रिकॉर्ड के संबंध में जब पता चला कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में जनवरी 2020 में रिकॉर्ड बना था। इसमें 1995 किलो खिचड़ी बनाई गई थी। इसलिये हमने दोगुनी मात्रा में खिचड़ी बनाने का फैसल लिया । पिछले साल गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए रजिस्ट्रेशन करा दिया था। उनका कहना है कि स्वयं के अलावा उनके साथ 25 लोगों की टीम भी इस काम में लगी रही।
खिचड़ी में किस-किस खाद्य सामग्री का हुआ उपयोग
खिचड़ी बनाने में आलू, कद्दू, टमाटर, धनिया, गाजर, पत्ता गोभी, फूल गोभी, मिर्च, धनिया और बरबटी का उपययोग किया गया । यह सामग्री 3 क्विंटल 80 किलो सब्जी लगी है । साथ ही 40 कि. तुअर दाल, 20 कि. चना दाल ,60 कि. हरी मूंग, घी 3 कि., हल्दी साढ़े 3 कि., धनिया 3 कि., हींग 300 ग्राम, जीरा 3 किलो आदि का उपयोग किया गया है।
पिछले साल कराया था रजिस्ट्रेशन
रमेश कुमार सांई मंदिर के व्यवस्थापक भी हैं। उन्होंने ही 11 अक्टूबर 2008 को मंदिर की स्थापना करवाई थी। हर साल इसी दिन खिचड़ी के भंडारे का आयोजन किया जाता है। वहीं, प्रत्येक गुरुवार को भी खिचड़ी का वितरण होता है। अबकी बार महाजन ने खिचड़ी का भंडारा पहले ही करने की ठानी। मंदिर के व्यवस्थापक महाजन ने बताया कि सबसे ज्यादा खिचड़ी पकाने के रिकॉर्ड के बारे में जब पता लगाया, तो हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में जनवरी 2020 में रिकॉर्ड बना था। इसमें 1995 किलो खिचड़ी बनाई गई थी। हम इससे दोगुनी मात्रा में खिचड़ी बना रहे हैं, इसलिए पिछले साल नवंबर में ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए रजिस्ट्रेशन करा दिया था। उन्होंने खुद खिचड़ी बनाई। उनके साथ 25 लोगों की टीम भी इस काम में लगी रही।
विशेष तौर पर बनवाई है हांडी
मंदिर में भंडारे के लिए विशेष तौर पर बड़ी हांडी बनवाई गई है। जिसका वजन 2 टन 40 किलो यानी दो हजार 40 किलो है। इस हांडी की क्षमता 12 हजार 500 लीटर की है। यह भोपाल के गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में विशेष तौर पर बनवाई गई है।
