भोपाल
राजधानी भोपाल नगर निगम में बिना काम कराए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये निकालने के मामले में लोकायुक्त की जांच तेज हो गई है। शुक्रवार को की गई छापेमारी के दौरान लोकायुक्त टीम ने नगर निगम के सर्वर रूम से हार्ड डिस्क जब्त की है, जिसका परीक्षण कराया जाएगा। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि फर्जी बिलिंग के इस पूरे खेल में अपर आयुक्त वित्त गुणवंत सेवतकर के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे। लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार जब्त किए गए डाटा के विश्लेषण के आधार पर अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी की गिरफ्तारी की जाएगी।
शिकायतकर्ता ने गुणवंत सेवतकर के खिलाफ नामजद शिकायत की थी, इसलिए प्राथमिकी में उन्हें आरोपी बनाया गया है। फिलहाल उनसे पूछताछ नहीं हो सकी है और जल्द ही उन्हें नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। प्रारंभिक जांच में नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप से भी बड़े पैमाने पर फर्जी बिल पास कराने के साक्ष्य मिले हैं। इसके बाद रविवार सुबह माता मंदिर के पास स्थित सेंट्रल वर्कशॉप कार्यालय में नगर निगम की टीम ने छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। यहां के जिम्मेदार अधिकारियों को भी लोकायुक्त द्वारा नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को नगर निगम के डाटा सेंटर सहित कई शाखाओं में छापेमारी कर पिछले करीब 10 वर्षों का रिकॉर्ड और सर्वर डाटा जब्त किया है। नगर निगम में फर्जी भुगतान की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर 9 मार्च को अपर आयुक्त वित्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद न्यायालय से सर्च वारंट लेकर कार्रवाई की गई। लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के मुताबिक शिकायत में आरोप है कि सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बिल तैयार किए गए और बिना काम कराए ही परिचितों व रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान कराया गया। मामले की जांच अभी जारी है।
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