भोपाल। राजधानी की लाइफ लाइन कहे जाने वाले ‘बड़ा तालाब’ को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान में प्रशासनिक अमले की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। एनजीटी (NGT) की कड़ी फटकार के बाद शुरू हुई यह मुहिम रसूखदारों के दबाव और नेतृत्व परिवर्तन के बीच फाइलों में सिमटती नजर आ रही है। तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर के दायरे में चिन्हित किए गए 347 अवैध कब्जों में से अब तक महज 50 पर ही बुलडोजर चल सका है। तालाब के संरक्षण के लिए तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने 6 से 21 अप्रैल तक का एक सख्त एक्शन प्लान तैयार किया था। इसके लिए पुलिस और नगर निगम के साथ समन्वय कर टीमें भी बनाई गई थीं।
शुरुआती चार दिनों (6, 10 और 13 अप्रैल) में भदभदा, हलालपुरा और सेवनिया गोंड क्षेत्र में कुछ बाउंड्रीवॉल और टीन शेड हटाए गए। लेकिन 12 अप्रैल को कलेक्टर के तबादले के बाद 15 अप्रैल से यह अभियान पूरी तरह ठप पड़ा है। सूत्रों की मानें तो जिम्मेदार अधिकारियों ने नेतृत्व बदलते ही बड़े अतिक्रमणों से दूरी बना ली है। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, 11 अप्रैल को बैरागढ़ के काशियाना बंगले के पीछे और 15-16 अप्रैल को मैरिज गार्डन सहित बड़े पक्के निर्माण हटाए जाने थे। वहीं, आज 17 अप्रैल को हुजूर तहसील की सरकारी जमीन से कब्जे हटाए जाने का प्रस्ताव था, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं दिखी।
गौरतलब है कि अब अभियान के केवल चार दिन (18 से 21 अप्रैल) शेष बचे हैं, जिनमें टीटी नगर और बैरागढ़ के शेष अतिक्रमण हटाना प्रस्तावित है। भोपाल के नवागत कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने पदभार ग्रहण करते ही भोज वेटलैंड को शहर की शान बताते हुए चुनौतियों को दूर करने की बात कही है।
हालांकि, जमीन पर हकीकत यह है कि सर्वे में आए 347 कब्जों में कई रसूखदारों और सरकारी विभागों के निर्माण भी शामिल हैं, जिन पर हाथ डालने से अधिकारी बच रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन अपने ही तय किए गए 21 अप्रैल के डेडलाइन तक इन बड़े अतिक्रमणों को हटाने का साहस जुटा पाता है या नहीं।
