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Tuesday, December 9, 2025
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भोपाल में पश्चिमी बाईपास के निर्माण का मामला लटका, जमीन अधिग्रहण की जांच के लिए कमिटी गठित

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भोपाल:

राजधानी भोपाल में प्रस्तावित पश्चिमी बाईपास के निर्माण में देरी हो सकती है। यह कॉरिडोर मंडीदीप को इंदौर से जोड़ेगा। इस परियोजना की लागत 3,000 करोड़ रुपए है। भूमि अधिग्रहण में अनियमितता की शिकायतों के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने जांच के लिए एक समिति का गठन किया है।

पीएमओ तक हुई है शिकायत
यह शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और मध्य प्रदेश पीडब्ल्यूडी को भेजी गई थी। पीडब्ल्यूडी ने 8 अक्टूबर को चार सदस्यीय समिति का गठन किया। इसमें पीडब्ल्यूडी के अधिकारी, संबंधित जिला कलेक्टरों के प्रतिनिधि और जिला पंजीयक के प्रतिनिधि शामिल हैं। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के पास समिति के गठन के आदेश की एक प्रति है।

जमीन खरीद फरोख्त की जांच होगी
समिति प्रस्तावित कॉरिडोर के पास पिछले कुछ महीनों में हुई जमीन की खरीद-फरोख्त की जांच करेगी। यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या इसमें अधिकारियों या एजेंसियों की संलिप्तता है। इसके लिए समिति जमीन मालिकों का विवरण मांगेगी। पश्चिमी बाईपास की घोषणा के बाद रास्ते में कितनी जमीन की बिक्री या समझौते हुए, इसकी भी जानकारी जुटाई जाएगी।

41 किमी लंबा है यह कॉरिडोर
41 किलोमीटर लंबा यह हाईवे मंडीदीप से शुरू होकर फंदा कलां में इंदौर रोड पर खत्म होगा। इसके दायरे में रायसेन, भोपाल और सीहोर जिलों की जमीन आती है। भोपाल में राष्ट्रीय राजमार्ग-46 पर पहले से ही 52 किलोमीटर लंबा बाईपास है। यह ग्यारह मिल से शुरू होकर भौरी भोपाल-इंदौर मार्ग पर खत्म होता है। यह शहर को तीन दिशाओं से कवर करता है। इससे इंदौर जाने वाले वाहनों को 23 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।

3,000 करोड़ रुपए की है परियोजना
41 किलोमीटर लंबे पश्चिमी हाईवे को फोर-लेन एक्सेस कंट्रोल के मानदंडों के साथ बनाया जाना है। इसके दोनों ओर सर्विस रोड भी होंगे। शुरुआती योजना के मुताबिक, लगभग 3,000 करोड़ रुपए की इस परियोजना में 427 करोड़ रुपए भूमि अधिग्रहण, 19 करोड़ रुपए उपयोगिता बदलाव और 15 करोड़ रुपए पर्यावरण प्रबंधन पर खर्च किए जाएंगे। बाकी रकम कॉरिडोर निर्माण पर खर्च होगी। पश्चिमी बाईपास बनने के बाद मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र सीधे इंदौर से जुड़ जाएगा। इससे कोलार से इंदौर जाने वाले लोगों का भी समय बचेगा।

शहर के पश्चिमी क्षेत्र को होगा फायदा
इससे शहर का पश्चिमी क्षेत्र व्यवस्थित होगा। जबलपुर और नर्मदापुरम से आने वाले भारी वाहन भोपाल के बाहर से इंदौर जा सकेंगे। इससे उन्हें 23 किलोमीटर की दूरी और एक घंटे का समय बचेगा। पश्चिमी बाईपास पूरा होने के बाद कोलार रोड और सीहोर रोड (रतिबड़ गांव) में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इंदौर और राजगढ़ जाने के लिए वैकल्पिक रास्ते भी उपलब्ध होंगे।

यह था प्लान
परियोजना में छह लेन के ढांचे के साथ चार लेन की सड़क और दोनों तरफ दो लेन की सर्विस रोड बनाने की योजना थी। इसके अलावा एक रेलवे ओवर ब्रिज, दो फ्लाईओवर, 15 अंडरपास और दो बड़े जंक्शन प्रस्तावित थे। इसका निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल पर किया जाना था। यह हाईवे परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले पीपीपी मॉडल का ही एक प्रकार है।

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