भोपाल. राजधानी का भेल दशहरा मैदान शनिवार को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुलजार हो उठा। यहां चल रहे भोजपाल महोत्सव मेले में प्रस्तुति देने आई प्लेबैक सिंगर स्नेहा भट्टाचार्य ने अपने सुमधुर गीतों से समा बांध दिया। भट्टाचार्य ने दमादम मस्त कलंदर से गानों की शुरुआत की। इसके बाद तेरी दीवानी, प्यार हुआ इकरार हुआ, ये शमा है प्यार का किसी के इंतजार का, चुरा लिया है तुमने जो दिल को, कहीं बदल न जाना जैसे एक से बढकऱ एक गीतों की प्रस्तुति दी। शाम 7.30 बजे मुख्य अतिथि हुजूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामेश्वर शर्मा, विशिष्ट अतिथि युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर, मेला अध्यक्ष सुनील यादव, संजोयक विकास वीरानी, महामंत्री हरीश कुमार राम, उपाध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी, महेंद्र नामदेव, अखिलेश नगर सहित मेला टीम ने गणेश वंदना और दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मेला अध्यक्ष सुनील यादव ने बताया कि भोजपाल महोत्सव मेला मंच पर देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। शनिवार को प्लेबैक सिंगर स्नेहा भट्टाचार्य के बाद रविवार को प्लेबैक सिंगह मास्टर सलीम अपनी गीत गजलों से लोगों को रिझाने आ रहे हैं।
मास्टर सीलम ढोल जगीरो दा’ से मचाएंगे धमाल
देश विदेश में धमाल मचाने के बाद मास्टर सलीम भोपाल में चल रहे भोजपाल महोत्सव मेले मेंं रविवार को धूम मचाने आ रहे हैं। मास्टर सलीम एक प्रसिद्ध भारतीय प्लेबैक सिंगर हैं, जो मुख्य रूप से पंजाबी, धार्मिक (भजन) और सूफी संगीत के लिए जाने जाते हैं। उनका वास्तविक नाम सलीम शहजादा है। शाहकोट, जालंधर, पंजाब में जन्मे मास्टर सलीम को संगीत की शिक्षा उनके पिता उस्ताद पूरन शाह कोटी से मिली। उन्हें बचपन से ही संगीत का ज्ञान था महज़ सात साल की उम्र में भटिंडा दूरदर्शन की ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्मेंस देने के बाद उन्हें ‘मास्टर सलीम’ के नाम से जाना जाने लगा।
10 साल की उम्र में पहला एल्बम आया
मास्टर सलीम का 10 साल की उम्र में पहला एल्बम ‘चरखे दी घूक’ रिलीज़ हुआ, जो काफी हिट हुआ था। मास्टर सलीम ने बॉलीवुड, पंजाबी फिल्म संगीत और भक्ति संगीत (भजन/भेंट) तीनों क्षेत्रों में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा है। उन्हें बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगिंग के लिए काफी प्रसिद्धि मिली। वे हिंदू-मुस्लिम सिख ईसाई भाईचारे को महत्व देते हैं और हर धर्म के त्यौहारों को मिलकर मनाने की वकालत करते हैं।
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सुपरहिट गीतों से मचाया धमाल
मास्टर सलीम ने ‘आहूँ आहूँ’, ‘माँ दा लाडला’, ‘हमका पीनी है’, ‘मस्त कलंदर’, ‘रोला पे गया’, ‘रजिय़ा’ जैसे गीतों की प्रस्तुति दे चुकी हैं। मास्टर सलीम पंजाबी संगीत उद्योग का एक अभिन्न अंग हैं और अपने डांसिंग ट्रैक जैसे ‘ढोल जगीरो दा’ के लिए भी मशहूर हैं। वह माता रानी की भेंट और शिव भजन जैसे धार्मिक गीतों के लिए भी बहुत प्रसिद्ध हैं। उनके भजन भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी सुने जाते हैं। मास्टर सलीम हिंदू-मुस्लिम सिख ईसाई भाईचारे को महत्व देते हैं और हर धर्म के त्यौहारों को मिलकर मनाने की वकालत करते हैं।
