भोपाल। मप्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत करीब 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बीते 25 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जिससे प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। भोपाल के जेपी अस्पताल के बाहर बुधवार को भी कर्मचारियों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। संविदा कर्मियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें जल्द नहीं मानीं, तो आगामी 8 जून को उग्र आंदोलन करते हुए मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे सालों से स्वास्थ्य सेवाओं में रीढ़ की हड्डी की तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन शासन स्तर पर उनकी जायज समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। पूर्ववर्ती शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान संविदा कर्मचारियों के हित में नीतियां बनाने पर सहमति तो जताई गई थी, लेकिन उसके बाद से अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संविदा कर्मी अजय अवस्थी और कामिनी मेहरा ने बताया कि प्रदेश के सभी 52 जिलों में यह हड़ताल पूरी एकजुटता के साथ जारी है और कर्मचारी अलग-अलग तरीकों व श्रमदान के जरिए शासन तक अपनी उपयोगिता और आवाज पहुंचा रहे हैं। कर्मचारियों का मुख्य आरोप है कि प्रशासन वर्ष 2023 की संविदा नीति को सही और पारदर्शी तरीके से लागू नहीं कर रहा है।
आंदोलनकारियों ने अपनी प्रमुख मांगों को रेखांकित करते हुए कहा कि सभी संविदा कर्मचारियों का अविलंब नियमितीकरण किया जाए, समान काम के बदले समान वेतन की व्यवस्था हो, और नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर ही महंगाई भत्ता (DA) व छुट्टियां प्रदान की जाएं। इसके अलावा, कर्मचारी एनपीएस (NPS) व हेल्थ इंश्योरेंस लागू करने, हर साल 10% वेतन वृद्धि सुनिश्चित करने, वेतन संशोधन व इंक्रीमेंट बहाल करने तथा लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग पर अड़े हैं। गौरतलब है कि राजधानी भोपाल में इन दिनों हटाए गए पेसा मोबिलाइजरों का भी भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन जारी है, जिससे प्रशासनिक अमले पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
