भोपाल। मप्र के रायसेन जिले के एक साधारण ग्रामीण परिवार (ग्राम सेमरी) से आने वाली पर्वतारोही अंजना यादव ने 27 मई को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848.86 मीटर) पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया है। करीब दो महीने चली इस बेहद जोखिमभरी और कठिन यात्रा से लौटने के बाद अंजना ने अपनी सफलता की रोमांचक कहानी साझा की। सरकारी स्कूल से पढ़ीं और साल 2018 से खेल जगत में सक्रिय अंजना अब तक 20 पर्वत चोटियों को फतह करने के साथ ही 22 नेशनल व 3 इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि एवरेस्ट फतह करने के लिए शारीरिक से ज्यादा मानसिक रूप से मजबूत होना पड़ता है, क्योंकि वहां हर कदम पर मौत का खतरा रहता है। ३ अप्रैल को नेपाल के काठमांडू पहुंचने के बाद उन्होंने बेस कैंप से करीब दो महीने तक 5 हजार मीटर की ऊंचाई पर रोटेशन कर खुद को वहां के वातावरण के अनुकूल ढाला, जहां तापमान -45 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। यात्रा के दौरान सामने आए अन्य पर्वतारोहियों के शवों को देखकर वे एक बार के लिए जरूर घबरा गईं थीं, लेकिन अपने सपनों को पूरा करने के दृढ़ संकल्प ने उन्हें पीछे नहीं हटने दिया।
इस एवरेस्ट अभियान का सबसे कठिन पल वह था जब 20 मई को वे 7 हजार मीटर ऊंचे तीसरे कैंप तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन खराब मौसम और भारी भीड़ के कारण गाइड ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया और उन्हें भावुक होकर वापस नीचे लौटना पड़ा। इसके बावजूद हार न मानते हुए वे 23 मई को दोबारा आगे बढ़ीं, 26 मई को चौथे कैंप पहुंचीं जहां तेज हवाओं के कारण कई टेंट तक उड़ गए थे, और उसी शाम उन्होंने अंतिम चढ़ाई शुरू की।
