भोपाल। भोपाल में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासनिक और नगर निगम की कार्रवाई एक बार फिर केवल नोटिस जारी करने की औपचारिकता तक सिमटती नजर आ रही है। हालिया कार्रवाई के तहत नगर निगम के कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र (रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा) में बिना अनुमति विकसित की जा रही 15 निर्माणाधीन निजी कॉलोनियों को चिन्हित कर उनके कॉलोनाइजरों को नोटिस थमाए हैं। इन सभी को 15 दिनों के भीतर स्वीकृत नक्शे, भूमि डायवर्जन और अन्य वैधानिक अनुमतियों के दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, और दस्तावेज न सौंपने की स्थिति में संबंधित थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है।
1 जून को हुई कॉलोनी सेल की समीक्षा बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसी संदिग्ध और अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार कर नए सिरे से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे शहर में एक बार फिर नोटिस अभियान तेज हो गया है। हालांकि, अगर पिछले तीन वर्षों के प्रशासनिक रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत को देखें, तो यह कार्रवाई महज कागजी खानापूर्ति दिखाई देती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में भोपाल में कुल 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं, जिनमें से दिसंबर 2016 से पहले की 320 कॉलोनियों को नियमों में रियायत देकर वैध करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके अलावा, प्रशासन द्वारा अब तक विभिन्न थानों में करीब 300 एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज होने के बावजूद आज तक एक भी रसूखदार कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं की जा सकी है।
इतना ही नहीं, पुलिस और प्रशासनिक ढर्रे के चलते किसी एक मामले में भी अब तक अदालत के समक्ष चालान (चार्जशीट) पेश नहीं किया जा सका है। अधिकतर मामलों में अमला केवल प्रतीकात्मक रूप से बाउंड्रीवाल या निर्माण का कोई छोटा हिस्सा तोड़कर लौट आता है, जबकि धरातल पर उन कॉलोनियों में अवैध प्लाटिंग और निर्माण गतिविधियां धड़ल्ले से जारी रहती हैं, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की प्रभावशीलता और दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
