भोपाल
भोपाल। राजधानी के प्रतिष्ठित हमीदिया अस्पताल में संवेदनहीनता और चिकित्सकीय लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। रायसेन निवासी एक प्रसूता ने 5 माह की प्री-मैच्योर डिलीवरी के दौरान महज 450 ग्राम की बच्ची को जन्म दिया, जिसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर रात करीब 12 बजे परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र थमा दिया। चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब पिता परवेज करीब 4 घंटे बाद एनआईसीयू (NICU) में बच्ची का शव लेने पहुंचे, तो उन्हें नवजात के शरीर में हलचल और सांसें चलती हुई दिखाई दीं। पिता ने तत्काल इसका वीडियो बनाया, जिसमें बच्ची का पेट हिलता नजर आ रहा है। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही और धक्का-मुक्की का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।
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वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन बचाव की मुद्रा में नजर आ रहा है। स्त्री एवं प्रसूति विभाग की अध्यक्ष डॉ. शबाना सुल्तान ने इसे ‘Abortus’ (20 सप्ताह से कम या 500 ग्राम से कम वजन का भ्रूण) केस बताते हुए कहा कि इतने कम वजन के शिशुओं में जीवित रहने की संभावना नगण्य होती है और कभी-कभी केवल शारीरिक प्रतिक्रियाएं दिखती हैं। हालांकि, डॉक्टरों ने यह स्वीकार किया कि नवजात को पर्याप्त समय तक ऑब्जर्वेशन में रखा जाना चाहिए था और जल्दबाजी में दी गई जानकारी से भ्रम की स्थिति पैदा हुई। विभाग ने दोषी ड्यूटी डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा है और जांच के बाद कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
