भोपाल
स्थानीय देवी अहिल्या बाई सभागार में बीते शुक्रवार को आयोजित नगर सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक में हेस्टू (एचएमएस) यूनियन के प्रतिनिधियों ने प्रबंधन के समक्ष कर्मचारियों और नगरवासियों से जुड़ी समस्याओं का पिटारा खोला। बैठक में यूनियन की ओर से एस. सेंथिल कुमार, छोटे लाल कोरी और मनीष टेकरे ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रबंधन ने यूनियन द्वारा उठाए गए सभी 19 बिंदुओं को गंभीरता से सुना और उन पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
बैठक की शुरुआत में यूनियन ने नगर प्रशासन के ‘बेदखली अमला विभाग’ की कार्यप्रणाली की सराहना की। एचएमएस प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से रमेश चंद्रा, चंद्रकांत विश्वकर्मा, प्रभारी प्रवीण पाटिल एवं उनकी पूरी टीम को उनके सराहनीय कार्यों के लिए बधाई दी। इसके पश्चात, कर्मचारियों के आर्थिक हितों पर चर्चा करते हुए मांग की गई कि क्वार्टरों में रहने वाले कर्मचारियों से लाइसेंस फीस और जल शुल्क न लिया जाए। साथ ही, राज्य सरकार की तर्ज पर 150 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का प्रावधान करने की बात भी प्रमुखता से रखी गई।
यूनियन ने नगर की व्यवस्थाओं में सुधार हेतु कई सुझाव दिए, जिसमें ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर फीडबैक सिस्टम शुरू करना, त्रिवेणी हॉस्टल के पदाधिकारियों में बदलाव और मांगलिक स्थलों (मैरिज हॉल्स) की बुकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना शामिल है। इसके अलावा, सोसायटी कर्मचारियों के क्वार्टर आवंटन नियमों में बदलाव कर ‘सीनियरिटी या लकी ड्रा’ व्यवस्था लागू करने की मांग की गई, ताकि जरूरतमंदों को आवास मिल सके। शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सभी सिविल कार्यालयों हेतु नए वाहन खरीदने, जलभराव की समस्या रोकने के लिए सड़क निर्माण से पूर्व ड्रेनेज निरीक्षण करने और वाटर प्रूफिंग जैसे कार्यों के टेंडर अनवरत जारी रखने का सुझाव दिया गया।
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सुरक्षा और स्वच्छता के मुद्दे पर यूनियन ने सख्त रुख अपनाते हुए क्वार्टरों से अवैध कब्जाधारियों को हटाने, नई बन रही झुग्गियों को ध्वस्त करने और क्वार्टर परिसर में हो रहे सूअर पालन पर रोक लगाने की मांग की। हाट बाजार के दिनों में ई-रिक्शा के कारण होने वाली ट्रैफिक जाम की समस्या और द्वार क्रमांक 6 के पास बिजली विभाग की सुरक्षा बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया गया। यूनियन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि आवश्यक सिविल कार्यों के लिए किसी प्रतिनिधि का इंतजार न किया जाए, बल्कि जनहित में कार्य तुरंत शुरू हों। अंत में, हाट बाजार से होने वाली सुविधा शुल्क की वसूली को पारदर्शी बनाने और मार्केट की बकाया दुकानों से प्रभावी वसूली करने पर भी जोर दिया गया।
