भोपाल। मध्य प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने देश विरोधी और आतंकी साजिशों के खिलाफ एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए मामले के तीसरे मुख्य आरोपी शाकिर मेव को गिरफ्तार कर लिया है। एटीएस की टीम ने शाकिर को राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से दबोचा है। जांच में सामने आया है कि शाकिर मेव इस पूरे सिंडिकेट में ‘सेकंड हेड कमांडर’ की भूमिका निभा रहा था और देश विरोधी साजिशों को अमलीजामा पहनाने में उसकी अहम भूमिका थी। आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगामी 20 जून तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जिससे नेटवर्क के अन्य ठिकानों और कड़ियों के बारे में गहन पूछताछ की जा सके।
दूसरी ओर, राजधानी भोपाल के काजी कैंप इलाके से पिछले दिनों खुफिया और बेहद गोपनीय तरीके से गिरफ्तार किए गए संदिग्ध स्लीपर सेल मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह से पूछताछ में जांच एजेंसियों को बेहद चौंकाने वाले इनपुट मिले हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, फराज को कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स ने मध्य प्रदेश में एक बड़ा राष्ट्रविरोधी नेटवर्क खड़ा करने, गरीब व अविवाहित युवकों का ब्रेनवॉश करने और सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने का बड़ा टास्क सौंप रखा था। चौंकाने वाली बात यह भी है कि फराज को इस डिजिटल नेटवर्क में “लश्कर कमांडर” के नाम से एक नई छद्म पहचान दी गई थी, जिसका उपयोग वह युवाओं को आकर्षित करने और सोशल मीडिया पर अपना दायरा बढ़ाने के लिए कर रहा था।
फराज को यह नई पहचान उसके साथी नईम अब्दुल्ला ने उपलब्ध कराई थी, जिसे एटीएस ने फराज की निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के देवबंद से शनिवार को गिरफ्तार किया था। वर्तमान में फराज और नईम दोनों 16 जून तक रिमांड पर हैं और जांच एजेंसियां दोनों को आमने-सामने बैठाकर पाकिस्तानी संपर्क, टारगेट किलिंग की साजिश और फंडिंग से जुड़े पहलुओं को खंगाल रही हैं। शुरुआती तफ्तीश में यह बात साफ हुई है कि फराज पिछले करीब चार वर्षों से टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर कई संदिग्ध ग्रुप्स के जरिए युवाओं को जोड़ने और देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े वीडियो साझा करने में सक्रिय था।
वह देवबंद में धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने के दौरान सहारनपुर निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में आया था, जिसने उसकी मुलाकात विदेशी हैंडलर्स से कराई थी।
एटीएस ने फराज का मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच (FSL) के लिए भेज दिया है, ताकि उसके चैट रिकॉर्ड्स, संपर्कों की सूची और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) के जरिए पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। इसके साथ ही, एटीएस उसके बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड्स भी खंगाल रही है ताकि विदेशी फंडिंग के स्रोतों का पुख्ता खुलासा हो सके।
