भोपाल। ईरान युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी का सीधा असर अब मध्य प्रदेश की बस परिवहन व्यवस्था पर दिखने लगा है। डीजल, टायर और अन्य ऑटो पार्ट्स के दाम आसमान छूने से बस संचालन की लागत पूरी तरह बेकाबू हो चुकी है। इस गहरे आर्थिक संकट के बीच प्रदेश के बस मालिकों ने सरकार पर किराया बढ़ाने को लेकर दबाव बेहद तेज कर दिया है।
इसी सिलसिले में बस मालिकों का एक प्रतिनिधिमंडल आज शाम भोपाल में परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मुलाकात कर अहम बातचीत करने जा रहा है। इस बैठक को लेकर जहां परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों में काफी उम्मीदें हैं, वहीं बस ऑपरेटरों ने साफ चेतावनी भी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर आज कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो शाम को ही प्रदेशव्यापी बसों की हड़ताल का ऐलान किया जा सकता है। बस संचालकों का कहना है कि वे पिछले तीन वर्षों से लगातार किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन स्तर पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेश में आखिरी बार 20 अप्रैल 2021 को बस किराया तय किया गया था, लेकिन उस समय भी संचालकों को अपेक्षित वृद्धि नहीं मिल सकी थी। तब से लेकर अब तक संचालन खर्च कई गुना बढ़ चुका है, जिससे यह व्यवसाय अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
बस मालिकों के अनुसार, लगातार बढ़ती महंगाई, कोरोना काल में हुए भारी नुकसान और सरकार की नई नीतियों ने इस व्यवसाय को गंभीर संकट में धकेल दिया है। बाजार में आई नई यूरो-6 (Euro-VI) बसों की बढ़ी हुई कीमतें और उनके रखरखाव (मेंटेनेंस) का भारी खर्च हालात को और बदतर बना रहा है। केवल मई महीने में ही चार बार डीजल के दाम बढ़ने से संचालन लागत में रिकॉर्ड इजाफा हुआ है, जबकि यात्रियों का किराया वर्षों से जस का तस बना हुआ है। इस असंतुलन के कारण बस ऑपरेटरों का आर्थिक गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है।
