भोपाल। मप्र उच्च न्यायालय की इन्दौर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए, निचली अदालत द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है । यह मामला सारंगपुर (राजगढ़) की प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें आरोपी आकाश को नाबालिग से छेड़छाड़, घर में घुसने और धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं सहित पोक्सो एक्ट की धारा 7, 8, 11 और 12 के आरोपों से बरी कर दिया गया था ।
राज्य सरकार ने निचली अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय से अपील करने की अनुमति (लीव टू अपील) मांगी थी । माननीय न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के प्रतिनिधि अम्बुज पटेल ने दलीलें पेश कीं । न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय (Apex Court) के विभिन्न कानूनी सिद्धांतों और नजीरों का हवाला देते हुए माना कि यदि मामले में विचारणीय बिंदु मौजूद हों, तो साक्ष्यों की दोबारा सूक्ष्म जांच और पुनर्मूल्यांकन के लिए अपील की अनुमति दी जानी चाहिए । दलीलों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की इस याचिका को स्वीकार कर लिया और अपील को अंतिम सुनवाई के लिए दर्ज करने के आदेश दिए ।
इसके साथ ही, माननीय न्यायालय ने बरी हो चुके आरोपी आकाश के खिलाफ 5,000 रुपये का जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया है, ताकि वह न्यायालय के समक्ष तय तारीखों पर उपस्थित हो सके ।
