11.5 C
London
Friday, March 13, 2026
Homeभोपालपति के दोस्त संग लिव-इन, बच्चा हो गया, 7 महीने बाद 'गलत...

पति के दोस्त संग लिव-इन, बच्चा हो गया, 7 महीने बाद ‘गलत काम किया’ ऐसी FIR, हाई कोर्ट में फिर जो हुआ

Published on

भोपाल:

कहानी ऐसी है कि एक लड़का एक लड़की प्यार में पड़कर एक साथ एक छत के नीचे रहने लगते हैं। सब अच्छा चल रहा होता प्यार भी खूब बढ़ता है। इश्क इस मुकाम तक आ जाता है कि लड़की को बच्चा हो जाता है। सात महीने बाद निजी कारणों और विवाद के चलते युवती युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराती है। केस हाई कोर्ट पहुंच जाता है। इसी पर कोर्ट अपना फैसला सुनाता है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप सहमति से बना था। महिला ने बच्चे को जन्म देने के 7 महीने बाद एफआईआर दर्ज कराई थी। महिला और आरोपी लिव-इन रिलेशनशिप में थे।

इस युवक के खिलाफ था मामला
अदालत ने एफआईआर रद्द करते हुए कहा कि मामले के हालात से यह नहीं लगता कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर महिला से गलत काम किया। वे लिव-इन रिलेशनशिप में थे और उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया। याचिकाकर्ता वीरेंद्र वर्मा ने कहा कि जबलपुर के एक पुलिस स्टेशन में जनवरी में उनके खिलाफ गलत काम का मामला दर्ज किया गया था। यह मामला उस महिला ने दर्ज कराया था जिसके साथ वह लिव-इन रिलेशनशिप में थे।

पति के दोस्त से संबंध
अपनी एफआईआर में 32 वर्षीय महिला ने कहा कि उसकी शादी हो चुकी थी। 2021 में उसके पति की मृत्यु हो गई थी। आरोपी उसके पति का दोस्त था और कभी-कभी उसके घर आता था। उसके पति की मृत्यु के बाद, उनके बीच संबंध बन गए। मई 2021 में उन्होंने शादी करने का फैसला किया और साथ रहने लगे। कुछ समय बाद आरोपी ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। चूंकि उसके उससे शारीरिक संबंध थे, इसलिए वह गर्भवती हो गई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया, जो अब 7 महीने का है। महिला का आरोप है कि आरोपी ने शादी का वादा करके 3 साल तक उसका फायदा उठाया, जिसे उसने पूरा नहीं किया।

नहीं किया शादी का वादा- युवक
हालांकि, याचिकाकर्ता ने इस बात से इनकार किया कि उसने महिला से शादी करने का वादा किया था। उसने कहा कि उनके बीच कुछ सालों तक संबंध थे। वे कई बार मिले थे। उन्होंने कहा कि इतने समय बाद ऐसा आरोप लगाना समझ में नहीं आता।

अदालत का फैसला
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के समान परिस्थितियों में दिए गए फैसलों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच संबंध आरोपी द्वारा शादी के आश्वासन पर विकसित नहीं हुए थे। अदालत ने यह भी कहा कि भले ही दोनों के बीच मनमुटाव हो, लेकिन ऐसी शिकायतें गलत काम के आरोप में किसी व्यक्ति पर मुकदमा चलाने का आधार नहीं बन सकती हैं। अदालत ने FIR रद्द करते हुए महिला को यह स्वतंत्रता दी कि वह आरोपी से गुजारा भत्ता या कोई अन्य राहत पाने के लिए सक्षम अदालत में जा सकती है।

Latest articles

समय पर खर्च करें केंद्रीय निधि, ताकि विकास की गति बनी रहे: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के विकास में केंद्रीय सहायता प्राप्त योजनाओं...

ईरान जंग का असर: देश में रसोई गैस का हाहाकार, ब्लैक में 1800 तक पहुंचा घरेलू सिलेंडर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बाद भारत में रसोई गैस की भारी किल्लत...

शादी के लिए पुजारी का अपहरण कर वसूले 50 हजार, मंडप से गिरफ्तार हुआ गैंग सरगना ‘भूरा हड्डी’

भोपाल जधानी की कोहेफिजा पुलिस ने पुजारी के अपहरण और अवैध वसूली के मामले में...

एमपी में बेटियां आजीवन पूजी जाती हैं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नारी शक्ति के सम्मान और उनके...

More like this

ईरान जंग का असर: देश में रसोई गैस का हाहाकार, ब्लैक में 1800 तक पहुंचा घरेलू सिलेंडर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बाद भारत में रसोई गैस की भारी किल्लत...

शादी के लिए पुजारी का अपहरण कर वसूले 50 हजार, मंडप से गिरफ्तार हुआ गैंग सरगना ‘भूरा हड्डी’

भोपाल जधानी की कोहेफिजा पुलिस ने पुजारी के अपहरण और अवैध वसूली के मामले में...

एमपी में बेटियां आजीवन पूजी जाती हैं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नारी शक्ति के सम्मान और उनके...