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Monday, March 16, 2026
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मंत्री विजय शाह ‘बद्जुबानी’ के बाद ‘गायब’, गैर मौजूदगी ने हजारों कर्मचारियों को ‘खतरे’ में डाला, जानें

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भोपाल

कहते हैं करनी किसी की, भरना किसी को। यानि करता कोई और है और उसकी भरपाई किसी और को करना पड़ता है। मध्यप्रदेश में ऐसी कहावत एक मंत्री के चलते कर्मचारियों के लिए सही साबित हो रही है। कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयानबाजी करने वाले जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह कुछ ऐसे ही साबित हुए हैं। उनके बुरे बयान के कारण विभाग के हजारों कर्मचारियों के सिर पर संकट मंडरा गया है।

दरअसल, पिछले 3 साल बाद प्रदेश में तबादलों से बैन हटा है। यह बैन केवल 31 मई तक के लिए हटाया गया है। उसके बाद पुन: लागू हो जाएगा। ऐसे में अब खबर आई है कि मंत्री ‘गायब’ हैं इस कारण तबादले अटक गए हैं।

इन दो जिलों के कर्मचारी हैं परेशान
जनजातीय कार्य विभाग के एक अधिकारी ने नवभारत टाइम्स को बताया कि हर विभाग के मंत्री हफ्ते में अधिकांश दिन मंत्रालय में बिता रहे हैं। वे अपने विभाग के तबादले की प्रक्रिया को अफसरों के साथ चर्चा कर रहे हैं। लेकिन विजय शाह का अता-पता नहीं है। ऐसे में उनके विभाग में आए हजारों की संख्या वाले तबादला आवेदन पर विचार नहीं हो पाया है। मंत्री विजय शाह के प्रभार वाले जिले रतलाम और झाबुआ है। जिनकी तबादले की फाइलें अटकी हुई है।

प्रभारी मंत्रियों को मिला है अधिकार
आपको बता दें कि अपने विभाग के तबादलों को ओटीपी देखकर मंत्री शाह ही मंजूरी देंगे। बावजूद इसके विभागी अफसर मंत्री को अभी तबादले से संबंधित प्रस्ताव नहीं भेज रहे हैं। विभाग प्रदेश भर से मिले तबादला प्रस्तावों की एक रिपोर्ट तैयार कर मंत्री को ई-ऑफिस के जरिए भेजेगा और इसके बाद मंत्री के मोबाइल पर आने वाले ओटीपी के बाद ही अनुमोदन किया जा सकेगा।

30 मई तक होने वाले तबादलों के बीच जनजातीय कार्य विभाग के तबादले मंत्री विजय शाह के बयान के चलते असमंजस में है। आखिर दफ्तर और कार्यक्रमों से दूरी बनाकर चल रहे मंत्री शाह के विभाग के तबादला आदेश उनके अनुमोदन के बगैर जारी कैसे होंगे? मंत्री के बयान वाले मामले की सुनवाई 28 मई को होना है।

कोर्ट फैसले के बाद ही दे पाएंगे ट्रांसफर ऑर्डर
एसआईटी अपनी रिपोर्ट कोर्ट को देगी और इसके बाद अगर मंत्री को अगर कोर्ट से राहत मिल जाती है तो वे तबादला प्रस्तावों को मंजूरी दे सकते हैं। चूंकि तबादला प्रक्रिया 30 मई के पहले ई ऑफिस के जरिए ही पूरी होनी है, इसलिए इस विभाग के अधिकांश आदेश अंतिम दौर में ही जारी होने की संभावना जताई जा रही है।

बता दें कि बयान पर हंगामा मचने के बाद मंत्री विजय शाह 14 मई को अपने विधानसभा क्षेत्र हरसूद और खंडवा में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए। इसके बाद 15 मई से वे कहीं भी नजर नहीं आए। 15 मई की रात को सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुई कि मंत्री विजय शाह पत्नी के साथ सचखंड एक्सप्रेस से भोपाल के लिए रवाना हुए हैं। लेकिन उसके बाद अता—पता नहीं है।

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