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ईएसआई अस्पताल सोनागिरी में मरीजों के साथ दुर्व्यवहार, इलाज के लिए भटकने को मजबूर कर्मचारी

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भोपाल। राजधानी के सोनागिरी स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल की अव्यवस्थाएं और संवेदनहीनता एक बार फिर सामने आई हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले बीमित कर्मचारियों और उनके परिजनों के साथ बदसलूकी और इलाज न मिलने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। ताजा मामला एक बीमित कर्मचारी मोहम्मद आरिफ खान का है, जिन्होंने अपनी बीमार मां को इलाज न देने और अस्पताल परिसर से बाहर निकालने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत के अनुसार, गत 8 मई को दोपहर करीब 12 बजे मोहम्मद आरिफ खान अपनी मां को उपचार के लिए ईएसआई अस्पताल सोनागिरी लेकर पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि उन्होंने पहले से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (पंजीयन) करा लिया था, इसके बावजूद वहां मौजूद डॉक्टर ने मरीज को देखने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों ने कई बार मिन्नतें कीं, लेकिन डॉक्टर का दिल नहीं पिघला। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज की तकलीफ सुनने के बजाय परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें वहां से जाने को कह दिया। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसके बाद स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों में भारी आक्रोश है।

अस्पताल में आने वाले अन्य मरीजों और उनके तीमारदारों ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मरीजों का कहना है कि जब वे अपनी समस्याओं या डॉक्टरों की शिकायत लेकर अस्पताल अधीक्षक से मिलने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें सुरक्षा गार्डों और अधीक्षक की महिला पीए द्वारा बाहर ही रोक दिया जाता है। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी सुनवाई या निराकरण के खाली हाथ लौटना पड़ता है, जिससे उनकी शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंच ही नहीं पातीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित पक्ष ने इसकी शिकायत उच्च स्तर पर दर्ज कराई है। शिकायत आईडी MOLBR/E/2026/0100291 के तहत यह मामला वर्तमान में लंबित है और इसकी आधिकारिक जांच अधिकारी राहुल भारद्वाज के स्तर पर की जा रही है।

स्थानीय नागरिकों और श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि सरकारी तंत्र और जनसेवा के लिए बने इन अस्पतालों में मरीजों को सम्मानजनक व्यवहार और समय पर इलाज मिलना चाहिए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टर और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है ताकि भविष्य में किसी अन्य लाचार मरीज को इस तरह प्रताड़ित न होना पड़े।

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