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Tuesday, June 9, 2026
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साकेत नगर के पार्क से अतिक्रमण हटाने हाईकोर्ट पहुंचे रहवासी, नगर निगम को 4 सप्ताह का समय

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भोपाल। मप्र उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने भोपाल के साकेत नगर सेक्टर-3सी स्थित पार्क पर अतिक्रमण कर संचालित की जा रही क्रिकेट अकादमी के मामले में नगर निगम आयुक्त को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। स्थानीय निवासियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने नगर निगम आयुक्त को चार सप्ताह के भीतर मामले की जांच कर पार्क से अतिक्रमण हटाने और अवैध व्यावसायिक गतिविधि बंद कराने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर नगर निगम आयुक्त के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही की जा सकती है।

प्रकरण से जुड़े याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता साहिल नायक ने बताया कि साकेत नगर भेल क्षेत्र के सेक्टर-3सी का विकास करते समय भोपाल विकास प्राधिकरण ने रहवासियों के स्वास्थ्य और मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए यहां पार्क का निर्माण किया था। आरोप है कि कुछ लोगों ने कथित समिति बनाकर पार्क को खेल मैदान में बदल दिया और वहां क्रिकेट अकादमी चलाने के लिए किराए पर दे दिया, जिससे क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं। इस संबंध में रहवासियों ने जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और पुलिस से शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने नगर निगम आयुक्त को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई करते हुए चार सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की की थी मांग

मप्र उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने पार्क में अवैध रूप से संचालित कोचिंग और क्रिकेट नेट लगाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को पहले नगर निगम के समक्ष विस्तृत आवेदन देने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने याचिका क्रमांक 9753/2026 (संजय नायक व अन्य बनाम मध्यप्रदेश राज्य व अन्य) की सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता साहिल नायक ने अदालत को बताया कि एक सार्वजनिक पार्क में अवैध रूप से व्यावसायिक कोचिंग गतिविधियां, क्रिकेट नेट और अन्य संरचनाएं लगाई गई हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को लगातार परेशानी हो रही है। उन्होंने इसे हटाने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता श्वेता यादव उपस्थित रहीं। न्यायालय ने कहा कि फिलहाल यह याचिका समय से पहले दायर की गई है। इसलिए याचिकाकर्ता दस दिन के भीतर नगर निगम आयुक्त को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ नया आवेदन प्रस्तुत करें। अदालत ने निर्देश दिया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद नगर निगम आयुक्त उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर मामले की जांच कर यथाशीघ्र, संभव हो तो चार सप्ताह के भीतर निर्णय लें। इसी निर्देश के साथ अदालत ने याचिका का निराकरण कर दिया। माननीय न्यायालय के आदेशानुसार यदि तय समय सीमा के भीतर नगर निगम द्वारा यह अतिक्रमण और कमर्शियल गतिविधि नहीं हटाई जाती है, तो निगम कमिश्नर के खिलाफ सीधे ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ की कार्यवाही की जाएगी।

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