भोपाल। आम जनता की जेब पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार को एक बार फिर ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। पिछले 9 दिनों के भीतर यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इस बार पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है।
इस ताजा वृद्धि के चलते मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में पेट्रोल की कीमतें 1 रुपये या उससे भी ज्यादा महंगी हो गई हैं। इस महीने (मई 2026) में अब तक तीन बार कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं। सबसे पहले 15 मई को ईंधन के दामों में सीधे ₹3 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद 19 मई को दूसरी बार करीब 90 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए। आज शनिवार को हुई तीसरी बढ़ोतरी के बाद, चालू महीने में पेट्रोल और डीजल कुल मिलाकर करीब ₹5 प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं, जिससे आम आदमी का घरेलू बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही इस आग को लेकर प्रदेश में सियासत भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस बढ़ोतरी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार का बहाना बनाकर सरकार लगातार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा रही है, जो सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर डाका डालने जैसा है।
इस महंगाई से मध्यम वर्ग और गरीब पूरी तरह टूट चुका है। जानकारों के मुताबिक, इस बेतहाशा बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आया भारी उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुए हालिया तनाव (जंग) से पहले कच्चे तेल के दाम जहां 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थे, वहीं अब यह उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुके हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से घरेलू तेल कंपनियां भारी दबाव में थीं, जिसके कारण घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाना पड़ा है। यदि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में ईंधन और महंगा हो सकता है।
