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महीने भर में 7.85 करोड़ के पार हुई महाकाल मंदिर की आय, VIP दर्शन कोटा खत्‍म होने से हुआ लाभ

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उज्जैन

इस बार भगवान महाकाल का खजाना भक्तों की भेंट से भर गया। बीते एक माह (26 मार्च से 25 अप्रैल) में मंदिर समिति को गर्भगृह में प्रवेश शीघ्र दर्शन टिकट और भस्म आरती अनुमति शुल्क से सात करोड़ 85 लाख रुपए की आय हुई है। श्रद्धालुओं का रुझान बढ़ने से अधिकारी उत्साहित हैं। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महाकाल महालोक बनने के बाद से लगातार दर्शनार्थियों की बढ़ रही है। मंदिर समिति ने सुगम दर्शन व्यवस्था व श्रद्धालुओं की सुविधा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे।

शीघ्र दर्शन के लिए 250 रुपए शुल्क
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान के शीघ्र दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध है। अगर भक्त भगवान महाकाल के जल्दी दर्शन करना चाहते हैं, तो वे 250 रुपये का शीघ्र दर्शन टिकट है। समिति ने सप्ताह के चार दिन मंगलवार से शुक्रवार तक दोपहर 12 से चार बजे तक भक्तों को गर्भगृह से निशुल्क दर्शन कराने की व्यवस्था की है। वहीं, सुबह 7.30 से दोपहर 12 बजे तथा शाम छह से रात रात 8:00 बजे तक सशुल्क के दर्शन कराए जा रहे हैं सुबह व शाम के इन दो स्‍लॉट में दर्शनार्थियों को प्रत्येक व्यक्ति 750 रुपए का शुल्क चुकाना होता है, इसके अलावा भस्म आरती के श्रद्धालुओं के लिए दो सौ रुपए शुल्क निर्धारित किया गया। श्रद्धालु ऑनलाइन शुल्क चुका कर भस्म आरती की अनुमति प्राप्त कर सकते हैं।

महाकाल मंदिर की आय के स्त्रोत
महाकाल मंदिर समित को लड्डू प्रसाद के विक्रय, 250 रुपए के शीघ्र दर्शन व प्रोटोकॉल को शुल्क के दायरे में लाने से प्राप्त आय, गर्भगृह में प्रवेश के लिए 750 व 1500 रुपये के टिकट, भस्म आरती के लिए निर्धारित 200 रुपये शुल्क, अभिषेक पूजन व शिखर पर ध्वज चढ़ाने की रसीद के साथ आनलाइन व आफलाइन दान से धनराशि प्राप्त होती है।

महाकाल लोक से बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्‍या
11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। इसके बाद से श्रद्धालुओं की संख्या में जमकर बढ़ोतरी शुरू हुई थी। वीकेंड और त्योहार को छोड़कर पहले रोज जहां 15 से 20 हजार श्रद्धालु दर्शन करते थे। वो आंकड़ा अब 60 हजार तक पहुंच गया है। शनिवार, रविवार और सोमवार को यह संख्या डेढ़ से ढाई लाख तक पहुंच जाती है। इसका मतलब मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 3 गुना बढ़ गई है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु किसी ने किसी रूप में दान देकर जाते हैं और यही वजह है कि महाकाल का खजाना तेजी से बढ़ रहा है।

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