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ट्विशा शर्मा केस: आरोपी पति समर्थ 29 मई तक सीबीआई रिमांड पर, क्राइम सीन का री-क्रेएशन शुरू

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भोपाल। अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में जांच अब बेहद तेज हो गई है। बुधवार को विशेष जांच दल ने आरोपी पति समर्थ सिंह को भोपाल कोर्ट में पेश किया, जहां से अदालत ने उसे 29 मई तक सीबीआई की रिमांड पर भेज दिया है। रिमांड मिलते ही सीबीआई की टीम आरोपी समर्थ को लेकर कटारा हिल्स स्थित उसके घर पहुंची, जहां घटना स्थल का बारीक निरीक्षण और क्राइम सीन का री-क्रेएशन किया जा रहा है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में आरोपी सास और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने की याचिका पर लंबी बहस के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता (AG) प्रशांत सिंह ने कोर्ट से कहा कि आरोपियों द्वारा जमानत की शर्तों का बर्बरता से उल्लंघन किया गया है। उन्होंने केस डायरी का हवाला देते हुए ५ मुख्य दलीलें रखीं असहयोग आरोपियों को दो बार नोटिस भेजे गए, लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया, जिसके बाद व्हाट्सएप पर नोटिस तामील कराना पड़ा। जल्दबाजी में जमानत इतनी गंभीर एफआईआर दर्ज होने के महज एक घंटे के भीतर ही निचली अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी, जबकि जांच प्रारंभिक चरण में थी।

लुका-छिपी का रवैया आरोपी लगातार जांच एजेंसी के सामने पेश होने से बचती रहीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए समय आरोपी सार्वजनिक मंचों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में सक्रिय रहीं, लेकिन जांच दल के पास नहीं गईं।

तथ्यों की अनदेखी ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन की सामग्री और केस डायरी को नजरअंदाज कर आरोपियों के दस्तावेजों पर भरोसा किया। पीड़ित परिवार के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने भी तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि मामला दर्ज कराने में देरी की गई और १५ मई को एफआईआर हुई। उन्होंने दलील दी कि सिर्फ ६३ वर्ष की उम्र होना जमानत का आधार नहीं हो सकता क्योंकि हर सास लगभग इसी उम्र की होती है। आरोपी प्रभावशाली हैं, जिनमें से एक रिटायर्ड जज और दूसरा वकील है, जो फॉरेंसिक और क्राइम सीन की बारीकियों को अच्छी तरह समझते हैं। गिरिबाला सिंह की तरफ से वरिष्ठ वकील नित्या ने इन आरोपों का खंडन करते हुए ५ प्रति-दलीलें दीं।
उन्होंने कहा कि ट्विशा की व्हाट्सएप चैट में कहीं भी सास पर दहेज या क्रूरता का सीधा आरोप नहीं है, बल्कि शिकायतें पति के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत मांगना कोई अपराध नहीं है और ६३ वर्ष की पूर्व जज महिला के फरार होने का कोई खतरा नहीं है, इसलिए उन्हें जेल भेजना उचित नहीं होगा।

 

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