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Wednesday, May 27, 2026
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DU से हो रहा छात्रों का मोह भंग? टॉप 100 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के 27 कॉलेज, फिर भी घट रहे आवेदन

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के 27 कॉलेज देशभर के टॉप 100 कॉलेज में शामिल हैं। भारत सरकार की नैशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2024 में 3317 कॉलेजों में से टॉप-10 कॉलेज में डीयू के 6 कॉलेज हैं। देश की यूनिवर्सिटीज में डीयू 6वें नंबर पर है। देशभर के संस्थानों में डीयू की काफी मांग रही है, लेकिन कुछ वर्षों में अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के लिए आवेदन की संख्या घट भी रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या छात्रों का दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई से मोह भंग हो रहा है या फिर इसकी वजह कुछ और है।

दरअसल कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेस टेस्ट (सीयूईटी) डीयू में आवेदन कम होने की एक बड़ी वजह है। 2022 में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के साथ सीयूईटी बड़ा बदलाव बनकर आया। 12वीं के नंबरों की रेस पर ब्रेक लगा और यूजी दाखिले के लिए एंट्रेंस प्लैटफॉर्म तैयार हुआ। मगर तीन साल में नैशनल टेस्टिंग एजेंसी की कई अनियमितताओं और गड़बड़ियों के साथ सीयूईटी और रिजल्ट में देरी की वजह से सेशन लेट हुए। पिछले साल क्लासेज 16 अगस्त से शुरू हुईं, तो इस बार 29 अगस्त से होंगी। जबकि सीयूईटी से पहले क्लासेज जुलाई के बीच में शुरू होती थीं।

सीयूईटी से पहले आवेदन ज्यादा:
डीयू में इस साल 71 हजार सीटों पर दाखिले होने हैं। यूनिवर्सिटी में 2022 में सीयूईटी से पहली बार दाखिले हुए, उस साल 2.17 लाख स्टूडेंट्स ने अप्लाई किया। 2023 में 2 लाख स्टूडेंट्स ने अप्लाई किया था। 2024 में 1.86 लाख स्टूडेंट्स ने ही कोर्स-कॉलेज की पसंद भरी है, जबकि 2.4 लाख ने रजिस्ट्रेशन किया था। सीयूईटी से पहले के आंकड़ें देखें तो आवेदनों की संख्या कम हुई है। 2021 में 2.87 लाख स्टू्डेंट्स, कोरोना काल और लॉकडाउन के बीच 2020 में बंपर 3.5 लाख, 2019 में 2.58 लाख, 2018 में 2.07 लाख, 2017 में 2.77 लाख, 2016 में 2.50 लाख स्टूडेंट्स ने अप्लाई किया था।

‘डीयू के लिए अच्छे हैं आंकड़ें’
हालांकि, डीयू की डीन प्रो. हनीत गांधी(एडमिशंस) का कहना है कि डीयू का क्रेज अब भी काफी है। NIRF में हमारे कई कॉलेज टॉप पर हैं। हम सीयूईटी के नतीजों के बाद जल्द से जल्द दाखिला प्रक्रिया शुरू कर देते हैं। जिसे डीयू में सीट चाहिए, वो प्राइवेट यूनिवर्सिटी छोड़कर भी आता है, क्योंकि चार साल महंगी फीस की बजाय वो कम फीस में क्वॉलिटी एजुकेशन लेना पसंद करता है। नए आंकड़ें अच्छे हैं।

ये उन्हीं स्टूडेंट्स को दिखा रहे हैं, जो असल में सीट चाहते हैं। पहले आंकड़े ज्यादा इसलिए भी होते थे, क्योंकि नीट, जेईई देने वाले डीयू में भी बैकअप के तौर पर अप्लाई करते थे। अब इंजीनियरिंग और मेडिकल के बाद डीयू में एडमिशन हो रहे हैं और सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में दाखिले एक साथ हो रहे हैं, तो डीयू को नुकसान नहीं है। इस बार तो हमारे सभी कॉलेजों के लिए स्टूडेंट्स का रुझान दिख रहा है। 6 स्टूडेंट्स ने तो 1507 कोर्स-कॉलेज कॉम्बिनेशन भरे हैं।

कई ने प्राइवेट कॉलेजों में सेफ की सीट
करियर काउंसलर्स का मानना है कि डीयू में लेट सेशन का नुकसान स्टूडेंट्स और डीयू को हो रहा है। करियर काउंसलर आलोक बंसल का कहना है कि देरी की वजह से स्टूडेंट्स स्टेट या प्राइवेट यूनिवर्सिटी की ओर चले जाते हैं, जहां दाखिला प्रक्रिया मई से जुलाई तक खत्म हो जाती है। 1 अगस्त से सभी कॉलेजों में क्लासेज शुरू हो चुकी हैं। कुछ में मिड जुलाई में ही। दूसरी ओर, डीयू में अभी पहली लिस्ट भी नहीं आई है। स्टूडेंट्स के मन में डर रहता है कि अगर बाद में डीयू में सीट नहीं मिली, तो प्राइवेट यूनिवर्सिटी से भी रह जाएंगे।

डीयू में साइकलॉजी ऑनर्स में रितिका गुप्ता का कहना है कि उन्होंने एक बंगलुरु में एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया है। अगर मिरांडा, हिंदू या स्टीफंस मिलता है, तो वहां की सीट कैंसल करेंगी। हालांकि पैसों का नुकसान काफी होगा। वहीं, अदिति जोशी का कहना है कि उन्हें डीयू में बीकॉम में एडमिशन चाहिए, लेकिन सीट की अनिश्चितता देखते हुए स्टेट यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया है।

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