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नेपाल में अब तक 104 प्लेन क्रैश, 914 मौतें… फ्रांस से जांच करने आए एक्सपर्ट

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नई दिल्ली,

नेपाल में विमान एटीआर-72 के हादसे की दुनियाभर में चर्चा हो रही है. पोखरा के पास हुए इस हादसे में 5 भारतीयों सहित 68 यात्रियों और 4 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई. जिसके बाद अब इस हादसे की वजह जानने के लिए नेपाल सरकार ने जांच भी शुरू कर दी है. जिसको लेकर 9 एक्सपर्ट्स की टीम जांच में मदद करने के लिए फ्रांस से नेपाल पहुंची है. इसी के साथ नेपाल की सरकार ने हादसे की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है. जिसको दुर्घटना की जांच करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है. इसके बाद उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी.

संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि एटीआर विमान बनाने वाली कंपनी की एक्सपर्ट्स की एक टीम मंगलवार को काठमांडू पहुंची. वहीं फ्रांस से पहुंची टीम मामले की जांच में जांच समिति की मदद करेगी. उन्होंने कहा कि समिति ने घटना की जांच शुरू कर दी है.

बता दें कि हादसे का शिकार हुए प्लेन को 15 साल पहले 2007 में शराब कारोबारी विजय माल्या के स्वामित्व वाली किंगफिशर एयरलाइंस ने खरीदा था. माल्या की एयरलाइंस कंपनी अब बंद हो चुकी है. वर्तमान में सिर्फ बुद्धा एयर और यति एयरलाइंस नेपाल में एटीआर-72 विमान का इस्तेमाल करती हैं.

नेपाल में कब हुआ पहला विमान हादसा
नेपाल सिविल एविएशन की मानें तो नेपाल में पहला विमान 1955 में क्रैश हुआ था. इसके बाद से अब तक 104 विमान हादसे हो चुके हैं. इन हादसों में 914 लोगों की मौत हुई है. पोखरा में हुआ विमान हादसा नेपाल का तीसरा सबसे बड़ा विमान हादसा है. इससे पहले मई 2022 में टारा एयरक्राफ्ट मुस्तांग में क्रैश हो गया था. 20 घंटे बाद विमान का मलबा बरामद हुआ था. इस दौरान शवों की खोज के लिए सेवन समिट ट्रेक्स टीम तैनात की गई थी. इसके प्रबंध निदेशक मिंगमा शेरपा ने कहा था कि उन्हें बचाव कार्य के दौरान उचित उपकरणों की कमी का सामना करना पड़ा था.

हालांकि, पोखरा में हुआ विमान हादसा एक अलग उदाहरण है. यहां मुस्तांग जैसी विकट स्थिति नहीं थी. डिजास्टर मैनेजमेंट एक्सपर्ट थुले राई ने बताया कि पोखरा नेपाल का बड़ा शहर है. यहां विमान हादसा दो एयरपोर्ट के बीच हुआ. ऐसे में यहां रेस्क्यू टीमों को स्टैंडबाई में रखा जाना चाहिए. मिंगमा शेरपा ने कहा कि भले ही विमान गहरी खाई में गिरा था. लेकिन सुरक्षाबल समय से पहुंच गए थे, ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन और बेहतर हो सकता था.

क्या थी हादसे की वजह?
नेपाल हादसे की सही-सही वजहों की बात करें तो इसके बारे में अभी तक पता नहीं चल सका है. लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि हादसा विमान में आई किसी तकनीकी खराबी के चलते हुआ. असल में एटीसी ने इस विमान को नीचे उतरने की इजाजत दे दी थी.

प्लेन विजिब्लिटी स्पेस में भी आ गया था. इसे एयर स्ट्रिप नंबर 30 पर उतरना था और अभी हवाई जहाज हवाई पट्टी से कोई साढ़ चौबीस किलोमीटर दूर था, लेकिन तभी फ्लाइट के कैप्टन कमल केसी ने एटीसी को बताया कि वह विमान को एयर स्ट्रिप नंबर 30 पर नहीं बल्कि 12 पर उतारना चाहते हैं.

इससे पहले कि वो ऐसा कर पाते प्लेन, एयरपोर्ट के नजदीक खाई की ओर झुक गया. कुछ सूत्रों ने बताया कि प्लेन ने नीचे उतरने के लिए जैसे ही अपने लैंडिंग गियर खोले, वो अपनी ऊंचाई बरकरार रखने में नाकाम हो गया, और यह हादसा हुआ. हालांकि यह सभी बातें अभी अनुमान के तौर पर ही देखी जा रही हैं.

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