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राजस्थान में 45 फीसदी रेप केस झूठे, पिछले साल के आंकड़ों पर डीजीपी की चौंकाने वाली रिपोर्ट

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जयपुर

राजस्थान पुलिस के डीजीपी उमेश मिश्रा ने दुष्‍कर्म के मामलों में चौंकाने वाला खुलासा किया है। डीजीपी मिश्रा के अनुसार महिला अत्याचार में इन्वेस्टिगेशन के बाद 47 फीसदी मामले झूठे पाए गए हैं। डीजीपी के अनुसार रेप के 41 फीसदी केस झूठे पाए गए हैं। दरअसल डीजीपी पुलिस मुख्यालय के सभागार में मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने पिछले साल की पुलिस विभाग की उपलब्धियों, कामों, इनोवेशन और योजनाओं का लेखा-जोखा दिया। इस दौरान जब मीडिया ने उनसे राजस्थान के बढ़ते रेप केसेज पर सवाल किया, तब उन्होंने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। 2021 के मुकाबले 2022 में 11 फीसदी से ज्यादा अपराध का ग्राफ प्रतिशत बढ़ने को डीजीपी उमेश मिश्रा ने तर्क दोष बताया।

डीजीपी मिश्रा ने कहा कि क्राइम बढ़ रहा है सिर्फ यह कहना गलत होगा। मिश्रा के अनुसार राजस्थान में केस रजिस्ट्रेशन की संख्या में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन बढ़ रहे हैं, ये कहना चाहिए। क्राइम का रजिस्ट्रेशन बढ़ा है इसलिए ग्राफ 11 प्रतिशत से ऊपर आया है। इस दौरान ही उन्होंने इंवेस्टिगेशन में लगभग आधे रेप केसेज फेक होने की बात भी कह डाली।

पेपर लीक पर भी बोले मिश्रा
आरपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले पर भी डीजीपी मिश्रा ने अपनी बात रखी। आरोपी सुरेश ढाका और भूपेंद्र सारण के पुलिस कार्रवाई से पहले ही फरार होने और पकड़ में नहीं आने के सवाल पर डीजीपी मिश्रा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बिना इंवेस्टिगेशन के हम किसी कंक्लूजन पर नहीं पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि इंवेस्टिगेशन के फैक्ट सामने आने के बाद ही हम कह पाएंगे कि सारण और ढाका कहां से मिले। उनके गिरफ्तार होने के बाद ही इस मामले की पूरी सच्चाई उजागर होगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी जल्दबाजी में जवाब नहीं दिया जा सकता।

वीकली ऑफ व्यवस्था शुरू
डीजीपी ने इस दौरान पुलिस मकहमें में हुए नए बदलाव भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चुनौतियों का सामना करने के लिए जहां एक ओर पुलिसकर्मियों के टेक्निकल स्किल वर्क में बढ़ोतरी की कोशिश की जा रही है। वहीं दूसरी ओर उनके वेलफेयर को देखते हुए वीकली ऑफ की व्यवस्था भी शुरू की गई है। प्रो-एक्टिव पुलिसिंग के जरिए अपराधियों पर शिकंजा कसा जाने की रणनीति भी बनाई है।

जून 2019 से बिना रुकावट एफआईआर, मिल रहे पॉजिटिव परिणाम
डीजीपी मिश्रा ने बताया कि जून 2019 से प्रदेश में अपराधों के “निर्बाध पंजीकरण” को राजस्थान सरकार ने महत्व दिया। इस इवोवेशन के अब पॉजिटिव रिजल्ट मिले हैं। जैसे साल 2018 में दुष्कर्म के 30.5 प्रतिशत मामले कोर्ट के माध्यम से दर्ज होते थे, जो अब घटकर मात्र 14.4 प्रतिशत रह गए हैं। साल 2020 से 2022 तक 45 डिकॉय ऑपरेशन किए गए। थानों में बिना रुकावट एफआईआर हो रही है या नहीं यह भी देखा जा रहा है।

साथ ही पुलिस अधीक्षक कार्यालयों में एफआईआर रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई है। जिसके तहत जून 2019 से 2022 तक 336 केस दर्ज किए गए। इसमें से 18 मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं करने वाले अधिकारियों पर खिलाफ कार्रवाई की गई है। सभी पुलिस थानों और ऑफिस में प्रतिदिन जनसुनवाई का समय तय किया गया। इसकी पालना भी सुनिश्चित कराने के लिए अभी तक 21 डि-कॉय ऑपरेशन किए गए हैं।

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