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दिल्ली में 52.9 और ईरान में 66 डिग्री सेल्सियस… हीटवेव दुनिया में तोड़ रहा रिकॉर्ड

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नई दिल्ली,

दिल्ली में 52.9 डिग्री सेल्सियस का पारा दिखाई दिया तो लोग त्राहिमाम करने लगे. ईरान में पारा 66 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है. हीटवेव लगातार दुनिया में बढ़ते तापमान का रिकॉर्ड तोड़ रहा है. 2022 में इंग्लैंड का तापमान जुलाई महीने में 40 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था. पिछले साल यानी 2023 में चीन का एक कस्बा 52 डिग्री सेल्सियस गर्मी झेल रहा था. साल 2021 में इटली के सिसली में पारा 48.8 डिग्री पहुंचा था.

हो क्या रहा है ये? धरती गर्म हो रही है. हवा गर्म हो रही है. पानी गर्म हो रहा है या ये कुछ समय की दिक्कत है. दिल्ली के मुंगेशपुर में जो पारा दिखाई दिया उसे लेकर कन्फ्यूजन है. मौसम विभाग मना कर रहा है. लेकिन तापमान तो बढ़ा है. इससे कैसे मना करेगा? पारा होता है 43 डिग्री, महसूस होता है 50 डिग्री सेल्सियस.

दिल्ली अब जाकर उन इलाकों में शामिल हुआ है, जो रिकॉर्ड तोड़ने वाले तापमान में पहले से थे. यानी वो इलाके जहां पारा 50 डिग्री सेल्सियस पहुंचता है. कभी-कभी उससे ऊपर भी निकल जाता है. जिनके उदाहरण अभी पहले पैराग्राफ में दिए गए. पिछली साल ईरान में जुलाई महीने में पारा 66 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था.

ईरान ने की थी सार्वजनिक छुट्टी
ईरान को सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा करनी पड़ी थी. बुजुर्गों को बाहर न निकलने की सलाह दी गई थी. अगर 66 डिग्री सेल्सियस का हीट इंडेक्स होता है, यानी वो जानलेवा है. इस तापमान को इंसानी शरीर बर्दाश्त नहीं कर पाएगा. ज्यादा देर तो नहीं. ऐसे में जो पारा हमें फील होता है, वो बहुत ज्यादा होगा. अस्पताल या मौत तो पक्की है. अभी हम 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास गर्मी बर्दाश्त कर रहे हैं, ज्यादा समय नहीं है, जब ये 50 डिग्री होगा.

क्यों टूट रहा है गर्मी का रिकॉर्ड?
लगातार पेट्रोल, डीजल का इस्तेमाल. जंगलों को काटना. इंडस्ट्री का बढ़ना. खेतीबाड़ी. इन सबसे ग्रीनहाउस गैसों का जमावड़ा होता है. ज्यादातर कार्बन डाईऑक्साइड और मीथेन. इसकी वजह से धरती के वायुमंडल में गर्मी फंस जाती है. इससे पृथ्वी पर मौजूद हर चीज का औसत तापमान बढ़ जाता है. चाहे वह जमीन हो. जल हो या हवा. इसकी वजह से मौसमी बदलाव होते हैं. चरम गर्मी यानी हीटवेव की घटनाएं बढ़ जाती हैं.

इंग्लैंड की कार्बन ब्रीफ नाम की संस्था ने एक रिपोर्ट दी थी कि साल 2013 से 2023 के बीच धरती के तापमान में 40 फीसदी का इजाफा हुआ है. खासतौर से अंटार्कटिका की तरफ. भारत में तो अब भी वैश्विक औसत तापमान से नीचे चल रही है गर्मी. अप्रैल 2024 लगातार 11वां सबसे गर्म महीना था. मई 2023 से अप्रैल 2024 के सभी महीने लगातार प्री-इंडस्ट्रियल काल (1850-1900) की तुलना में 1.61 डिग्री सेल्सियस गर्म थे.

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