वॉशिंगटन
धरती पर मानव इतिहास में पहली बार वैश्विक जल चक्र का संतुलन बिगड़ गया है। एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस असंतुलन के चलते जल आपदा बढ़ रही है जो आगे चलकर खाद्य उत्पादन और जीवन पर कहर बरपाएगी। जल अर्थशास्त्र पर वैश्विक आयोग की बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि दशकों से विनाशकारी भूमिक उपयोग और जल कुप्रबंधन ने वैश्विक जल चक्र पर अभूतपूर्व तनाव डालने के लिए मानव-कारण जलवायु संकट को टक्कर दी है।
क्या है जल चक्र?
जल चक्र उस प्रणाली को कहा जाता है जिसके जरिए पानी पृथ्वी के चारों ओर घूमता है। पानी जमीन पर नदियों, झीलों और पौधों के जरिए भाप बनकर ऊपर उठता है। यह जल वाष्प बादलों के रूप में ठंडा होने और बारिश के रूप में जमीन पर गिरने से पहले लंबी दूरी तय करता है। जल चक्र में असंतुलन के चलते लगभग 3 अरब लोग पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। फसलें मुरझा रही हैं और शहर डूब रहे हैं।
निपटा न गया तो होंगे भयावह नतीजे
अंतरराष्ट्रीय नेताओं और विशेषज्ञों के समूह वाले जल आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि अगर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो इसके परिणाम और भी भयावह होंगे। रिपोर्ट में पाया गया कि जल संकट वैश्विक खाद्य उत्पादन के 50 प्रतिशत से अधिक को खतरे में डालता है। 2050 तक देशों के सकल घरेलू उत्पाद में औसतन 8% की कमी आने का खतरा है। वहीं, कम आय वाले देशों में 15 प्रतिशत तक का नुकसान होने का अनुमान है।
आयोग के सह अध्यक्ष और रिपोर्ट के लेखक जोहान रॉकस्ट्रॉम ने कहा, ‘मानव इतिहास में पहली बार हम वैश्विक जल चक्र को असंतुलित कर रहे हैं। सभी मीठे पानी का स्रोत बारिश है, जिस पर अब भरोसा नहीं किया जा सकता है।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि जल चक्र में हो रही बाधा जलवायु परिवर्तन के साथ गहराई से जुड़ी हुई है।
क्या है बचाने का उपाय?
सीएनएन ने इंग्लैंड के रीडिंग विश्वविद्यालय में जलवायु विज्ञान के प्रोफेसर रिचर्ड एलन के हवाले से बताया है कि मानवीय गतिविधियां जमीन और ऊपर की हवा के ताने-बाने को बदल रही है, जिससे जलवायु गर्म हो रही है। नमी और सूखा दोनों चरम की ओर बढ़ रहे हैं। हवा और बारिश का पैटर्न असंतुलित हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस संकट का समाधान केवल प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और ताप प्रदूषण में कमी के माध्यम से ही किया जा सकता है।
