8.6 C
London
Thursday, May 7, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयभारत के खिलाफ अमेरिकी प्रोपेगैंडा की खुली पोल, धार्मिक स्वतंत्रता पर रिपोर्ट...

भारत के खिलाफ अमेरिकी प्रोपेगैंडा की खुली पोल, धार्मिक स्वतंत्रता पर रिपोर्ट बनाने वाले आयोग में एक भी हिंदू नहीं

Published on

वाशिंगटन

अमेरिका में रह रहे भारतवंशी समुदाय ने धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) के ऊपर भारत और हिंदुओं को लेकर पक्षपाती रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया है। भारतीय प्रवासियों के संगठन फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) ने कहा है कि अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग में दुनिया के तीसरे सबसे बड़े धर्म का एक भी प्रतिनिधि नहीं है, लेकिन यह हिंदुओं के ऊपर रिपोर्ट तैयार करता है। एफआईआईडीएस ने अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की रिपोर्ट में विविधता और संतुलन की कमी बताई।

अमेरिकी आयोग में हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं
समाचार एजेंसी पीटीआई से FIIDS के रणनीति प्रमुख खंडेराव कांड ने शुक्रवार को बताया, पृथ्वी पर हर छह में से एक व्यक्ति हिंदू धर्म से है। आयोग में इसका प्रतिनिधित्व नहीं है। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट में विविधता लाने और उचित संतुलन बनाने के मामले में यह बड़ी चूक होगी।

खंडेराव अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग में तीन नए आयुक्तों की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। नए नियुक्त मॉरीन फर्ग्यूसन, विकी हार्टजलर और आसिफ महमूद हैं। इसी 14 मई को आयोग के पिछले आयुक्तों अब्राहम कूपर, डेविड करी, फ्रेडरिक डेवी, मोहम्मद माजिद, नूरी तुर्केल और फ्रैंक वुल्फ का कार्यकाल समाप्त हो गया था। खंडेराव ने जोर दिया कि नई नियुक्तियां दर्शाती हैं कि अमेरिकी सरकार ने यूएससीआईआरएफ में विविधता और संतुलन के लिए एक प्रतिनिधि रखने का ऐतिहासिक अवसर गंवा दिया है। भारत को लेकर संस्था की हालिया वार्षिक रिपोर्ट को लेकर उन्होंने ध्यान दिलाया कि ऐसी रिपोर्ट हमेशा चूक से भरी होती हैं।
ईरान इंडिया की डील से भड़का अमेरिका, क्या बाइडेन लगा देंगे प्रतिबंध?

अमेरिका की रिपोर्ट में तथ्यों की कमी
कांड ने कहा, ‘अध्ययन संदर्भों को नहीं दर्शाता है। यह ऐतिहासिक तथ्य या रुझान नहीं देता है। इस तरह रिपोर्ट एक नैरेटिव के हिसाब से चलने लगती है और इसलिए यह तथ्यात्मक रूप से पूर्ण नहीं होती है, और यह एक विवाद बन जाती है। यह निश्चित रूप से भारत विरोधी है।’ उन्होंने कहा, ‘अध्ययन में इस बात पर पारदर्शिता का अभाव है कि विशेषज्ञों का चयन कैसे किया जाता है या साक्ष्य कैसे एकत्र किए जाते हैं। इसमें विविधता की कमी है, जिसके चलते रिपोर्ट विवादात्मक और पक्षपाती लगती है।’

Latest articles

बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के पीए की गोली मारकर हत्या, नॉर्थ 24 परगना के मध्यग्राम इलाके में 4 गोलियां मारी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पीए...

राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष ने किया पद भार ग्रहण

भोपाल। 6 मई को प्रातः 11 बजे राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष डॉ....

BHEL में CMD पद के लिए निकली भर्ती

नई दिल्ली। Government of India के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अंतर्गत आने वाले...

भोपाल में चयनित शिक्षक-अभ्यर्थियों में आक्रोश, डीपीआई के सामने किया प्रदर्शन

9 माह से नियुक्ति नहीं मिलने से नाराज, कहा- आदेश जारी नहीं हुए तो...

More like this

अमेरिका-ईरान में फिर बढ़ा तनाव, होर्मुज में बने जंग जैसे हालात-सैन्य गतिविधियां जारी

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है, जहां ईरान...

चीन के हुनान में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 21 की मौत, 61 लोग घायल

बीजिंग। मध्य चीन के हुनान प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और खौफनाक खबर सामने...

वॉशिंगटन में डिनर के दौरान फायरिंग, ट्रम्प को सुरक्षित निकाला, हमलावर पकड़ाया

चश्मदीद बोले- 7 राउंड फायरिंग हुई, गेस्ट टेबल के नीचे छिपे वॉशिंगटन। अमेरिका की राजधानी...