अहमदाबाद
2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर हुई थी। पिछले दो दशक में पहली बार बीजेपी का प्रदर्शन दो अंकों में था। कांग्रेस की फाइटिंग स्प्रिट की तारीफ हुई थी। यह माना गया था कि इससे बने मूमेंटम के जरिए कांग्रेस ने राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश बीजेपी से छीन लिए थे, 2022 के क्या होगा? जो होगा उसका सीधा असर 2024 के चुनावों पर पड़ेगा। गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य हैं ऐसे में बीजेपी के प्रदर्शन की पूरी चीर-फाड़ भी की जाएगी। राज्य में जो अभी स्थिति है उसके हिसाब से आम आदमी पार्टी ने सुर्खियां तो बटोरी हैं लेकिन वह कितने वोट झटक पाएगी? इसका अनुमान आने वाले दिनों में लगेगा और नतीजों में स्पष्ट होगा।
हाई नहीं ‘लो लेवल’ का प्रचार
गुजरात में कांग्रेस मुख्य विपक्ष है, लेकिन इस बार के चुनावों में अभी तक गांधी परिवार की मौजूदगी नहीं है। कांग्रेस स्थानीय नेताओं के बल पर राज्य में सक्रिय है। पार्टी शहरों की अपेक्षा ग्रामीण सीटों पर अधिक फोकस कर रही है। पिछली बार कांग्रेस ने ग्रामीण इलाकों में बीजेपी को करारी पटखनी दी थी। कांग्रेस की प्रदेशव्यापी परिवर्तन संकल्प यात्रा को छोड़ दें तो कोई बड़ा ताम-झाम अभी तक नहीं हुआ है। कांग्रेस के इस बदले रुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी ध्यान खींचा था। यह सही है कि कांग्रेस आदिवासी,दलित बहुल और ग्रामीण क्षेत्र की बैठकों पर फोकस कर रही है। प्रदेश में विधानसभा की 182 सीटें हैं। इनमें 55 सीटें सिर्फ चार बड़े शहरों में हैं। इनमें अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और वडोदरा शामिल हैं, जबकि 127 सीटें सेमी अर्बन हैं। इसमें भी बंटवारा करें तो करीब 100 से अधिक सीटें ग्रामीण हैं। कांग्रेस इन्हीं सीटों पर फोकस कर रही है।
कांग्रेस के सामने डबल चैलेंज
2022 के चुनाव में कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ से अपना वोट बैंक बचाना है तो दूसरी तरफ उसे अपने वोट बैंक को बढ़ाना है। पार्टी इस चुनौती से कैसे निपटेगी? देखना दिलचस्प होगा। पिछली बार बीजेपी को 99 पर रोकने वाले अशोक गहलोत इस बार मुख्य आर्ब्जवर की भूमिका में हैं तो उनके शिष्य कहे जाने वाले डॉ. रघु शर्मा गुजरात के प्रभारी हैं। उन्होंने पिछले महीनों में कांग्रेस को बूथ स्तर पर मजबूत बनाने की कोशिशें की हैं। इसके लिए वे मेरा बूथ-मेरा गौरव कार्यक्रम लेकर आए थे। भारत जोड़ो यात्रा से पहले अहमदाबाद में बूथ इंचार्ज का बड़ा सम्मेलन भी हुआ था। कांग्रेस को खतरा आप (Aap) से अधिक है। यह सभी मान रहे हैं, लेकिन बीते दिनों में स्थिति बदली है। आप जो कांग्रेस के वोट तोड़ती दिख रही थी अब बीजेपी के लिए भी खतरा बन सकती है। इसकी वजह उसका अपना नेचर और प्रचार का पैटर्न है। शहरी क्षेत्र में अगर बीजेपी को वोट खिसके तो कांग्रेस की बांछें खिल सकती हैं।
बीजेपी के लिए जीत जरूरी
गुजरात के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक डॉ. हरि देसाई कहते हैं कि 2022 का चुनाव बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होगा। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से बातचीत में उन्होंने कहा कि आप अभी वोट कटाने की भूमिका में दिख रही है। आप ने हो-हल्ला खूब मचाया है, लेकिन सीरियस कंटेंडर कांग्रेस ही है। देसाई कहते हैं कि 2022 में सरकार बनाना बीजेपी के लिए अनिवार्यता है, क्योंकि इसमें गड़बड़ी हुई तो 2024 प्रभावित होगा। ऐसे में बीजेपी सरकार तो बना लेगी, 2017 के मुकाबले सीटें भी बढ़ेंगी, लेकिन परिस्थितियां बीजेपी के बहुत अनुकूल नहीं है। इस चुनाव में तय होगा कि 2024 की राजनीति कैसी होगी? देसाई कहते हैं आप से सिर्फ कांग्रेस के लिए थ्रेट नहीं है। वह निश्चित तौर पर बीजेपी के भी वोट झटकेगी।
नंबर एक पर है बीजेपी
वरिष्ठ पत्रकार अजय उमट कहते हैं कि आम आदमी पार्टी गुजरात में आक्रामक कैंपेन की है। इसका फायदा उन्हें मिलेगा। आप की कमजोरी यह है कि उनके पक्ष में कोई जातीय समीकरण नहीं दिख रहा है और सीएम के कोई मजबूत चेहरा नहीं है। कांग्रेस बीजेपी (BJP) के बाद दूसरे नंबर पर रहेगी। आप कुछ सीटें जरूर जीत सकती है। उमट कहते हैं अभी कैंडिडेट का ऐलान बाकी है। बीजेपी से टिकट के दावेदार अधिक हैं। ऐसे में देखना होगी पार्टी इसे कैसे हैंडल करती है। अगर इसका लाभ आप उठाती है तो थोड़ी चीजें बदल सकती है। उमट करते हैं कि आदिवासी और ग्रामीण बेल्ट में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहेगा।
