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क्या हम लड़कियों की जिंदगी आसान बना रहे हैं? हिजाब केस में जस्टिस धूलिया की टिप्पणी

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नई दिल्ली,

कर्नाटक में शिक्षक संस्थानों में हिजाब बैन पर सुप्रीम कोर्ट से दो जजों की बेंच ने अलग अलग फैसला दिया है. जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक सरकार द्वारा हिजाब बैन को सही ठहराया है. लेकिन जस्टिस सुधांशु धूलिया ने हिजाब पहनने पर लगाई गई पाबंदी को गलत ठहराया है और कर्नाटक सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच से बंटा हुआ फैसला आने के बाद इस केस को बड़ी बेंच के पास भेजा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस यूयू ललित इस मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच का गठन करेंगे.

फिलहाल कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर बैन जारी रहेगा. बता दें कि जस्टिस हेमंत गुप्ता इस बेंच की अध्यक्षता कर रहे थे. इस केस में फैसला सुनाते हुए जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि इस फैसले पर दो तरह के विचार हैं.

जस्टिस धूलिया ने कहा कि उच्च न्यायालय ने गलत रास्ता अपनाया है और हिजाब पहनना अंततः “पसंद का मामला है, न तो कुछ ज्यादा और न ही कम. जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कहा,” हाई कोर्ट ने गलत रास्ता पकड़ा है, यह पसंद का मामला है, आर्टिकल 14 और 19 का मामला है. यह पसंद से जुड़ा मामला है, न इससे कुछ ज्यादा और न ही इससे कुछ कम.

जस्टिस धूलिया ने अपने फैसले में लड़कियों की शिक्षा को तरजीह दी. उन्होंने कहा कि इस फैसले पर विचार करते समय मेरे मन जो सबसे पहला सवाल आया था वो लड़कियों की शिक्षा का था. उन्होंने कहा,”क्या हम उनके जीवन को बेहतर बना रहे हैं? यह मेरे दिमाग में एक सवाल था… मैंने 5 फरवरी के सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है और कहा है कि बिजॉय इमैनुएल केस में आया फैसला इस मुद्दे को पूरी तरह से कवर करता है.” उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य सी बात है कि मुख्य रूप से ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में एक लड़की को बहुत कठिनाइयां होती हैं, उन्हें स्कूल जाने से पहले कई काम करना पड़ता है. कई और दिक्कतें होती हैं, क्या हम उनकी जिंदगी को आसान बना रहे हैं?

बता दें कि कर्नाटक सरकार ने 5 फरवरी को राज्य के शिक्षण संस्थानों में हिजाब को बैन कर दिया था. ये विवाद इसी साल जनवरी में तब शुरू हुआ था जब एक छात्रा हिजाब पहनकर क्लासरूम जाना चाह रही थी. विद्यालय प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी. इसके बाद विवाद होने पर कर्नाटक में प्रशासन को कुछ दिनों के लिए शिक्षण संस्थाओं को बंद करना पड़ा. इसके बाद राज्य सरकार ने शिक्षण संस्थाओं में हिजाब को बैन कर दिया. इसके बाद ये मामला हाई कोर्ट में गया. जहां हाई कोर्ट ने कहा कि हिजाब इस्लाम का आवश्यक हिस्सा नहीं है. अदालत ने हिजाब बैन करने के राज्य सरकार के आदेश को भी सही ठहराया. कर्नाटक हाई कोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज बंटा हुआ फैसला आया है.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में जहां जस्टिस धूलिया ने हिजाब पर बैन को गलत करार दिया तो जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब पर बैन को जायज ठहराया. उन्होंने कहा कि फैसला देने से पहले 11 सवालों पर विचार किया गया और इन सबका जवाब दिया गया. इसमें धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का दायरा एक मुद्दा है. क्या हिजाब पहनना आवश्यक धार्मिक रिवाज माना जाता है. उन्होंने कहा कि मैंने सभी पिटीशन को खारिज कर दिया है. जस्टिस गुप्ता ने मामले पर सुनवाई के दौरान क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता के अधिकार के परस्पर अलग अलग हैं या एक दूसरे के पूरक हैं, क्या हिजाब पहनना आवश्यक धार्मिक प्रथा के तहत आता है जैसे सवालों पर भी गौर किया.

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