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Wednesday, April 29, 2026
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बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, सख्त लहजे में कहा ‘हम अंधे नहीं’

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नई दिल्ली

पतंजलि भ्रामक विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी को खारिज करते हुए कहा कि ‘हम अंधे नही हैं’। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में वो उदार नहीं होना चाहते। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट इस केस में केंद्र के जवाब से भी संतुष्ट नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हम आपका दूसरा माफीनामा स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि वो अगली कार्रवाई के लिए तैयार रहें। शीर्ष अदालत ने कहा कि समाज में सही संदेश जाना जरूरी है।

माफी और दाखिल हलफनामे से संतुष्ट नहीं
इस मामले की सुनवाई जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने की। बेंच ने वकीलों से कहा अदालत अवमाननाकर्ता को संबोधित करें, तो बीच में न आएं। कार्रवाई शुरू होने के बाद सॉलसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘मैंने उन्हें बिना शर्त माफी मांगने की सलाह दी थी. उनसे मुझे जो मिला था, वह उसी के अनुरूप है। इसके जवाब में जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि हम उनकी माफी से संतुष्ट नहीं है। बेंच ने कहा वे सिफारिश में विश्वास नहीं करते, मुफ़्त सलाह हमेशा वैसे ही स्वीकार की जाती है। हम दाखिल हलफनामे से संतुष्ट नहीं हैं।

पढ़िए अदालत की कार्यवाही के बड़े अपडेट्स

➤ सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील रोहतगी ने बताया कि मामले में 2 हलफनामे हैं। एक पतंजलि और उसके एमडी (प्रतिवादी संख्या 5 और 6) द्वारा, दूसरा बाबा रामदेव (प्रतिवादी संख्या 7) द्वारा। वरिष्ठ वकील पटवालिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से पीडीएफ डाउनलोड की अनुमति नहीं है।

➤ जस्टिस कोहली ने कहा, ‘जब तक मामला खबरों में नहीं आया, इस अदालत को हलफनामे का लाभ नहीं मिला था। इस अदालत के समक्ष रखे जाने से पहले सार्वजनिक डोमेन में लाया गया। वकील रोहतगी ने पतंजलि एमडी का हलफनामा पढ़ते हुए कहा, ‘मैं इसके द्वारा अयोग्य और बिना शर्त माफी मांगता हूं। मैं कथन का अनुपालन करने का वचन देता हूं। मैं कहता हूं कि भविष्य में कोई चूक नहीं होगी। मेरा इरादा आदेश का उल्लंघन करने का नहीं था।’

➤ इसके बाद जस्टिस कोहली ने कहा, ‘अवमानना मामले में, जब आप यह कहकर छूट मांगते हैं कि मेरे पास विदेश यात्रा का टिकट है, तो आप कह रहे हैं कि मेरे पास नहीं है? आप इस प्रक्रिया को बहुत हल्के में ले रहे हैं। रोहतगी ने बताया टिकट एनेक्सचर में था, जो कि अगले दिन आ गया।’

➤ जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, कोर्ट में झूठी गवाही दी गई है। आपने अपना स्पष्टीकरण दे दिया है, हम विचार करेंगे। जस्टिस कोहली ने कहा, इस मुद्दे को अलग रखें।

➤ इसके बाद कोर्ट में बाबा रामदेव का हलफनामा पढ़ा गया। उन्होंने विज्ञापन जारी करने के संबंध में बिना शर्त माफी मांगी। जस्टिस कोहली ने कहा, हम इसे स्वीकार करने से इनकार करते हैं, हम इसे जानबूझकर उल्लंघन मानते हैं। हलफनामे की अस्वीकृति के बाद किसी भी चीज के लिए तैयार रहें।’

➤ जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, ‘हम अंधे नहीं हैं।’ वकील रोहतगी बोले- ‘लोग गलतियां करते हैं। बेंच ने जवाब दिया ‘तब उन्हें कष्ट होता है। हम इस मामले में इतना उदार नहीं होना चाहते।’

➤ जस्टिस कोहली ने कहा, ‘हमें आपकी माफ़ी को उसी तिरस्कार के साथ क्यों नहीं लेना चाहिए जैसा कि अदालत को दिखाया गया है? हम आश्वस्त नहीं हैं। अब इस माफी को ठुकराने जा रहे हैं।

➤ वकील रोहतगी ने कहा, इस केस को 10 दिनों के बाद सूचीबद्ध करें। जस्टिस कोहली ने कहा, अब एक संदेश समाज को जाना चाहिए।

➤ कोर्ट ने कहा हम सरकार के जवाब को भी देखेंगे। हम इसे आपके आचरण का हिस्सा बना रहे हैं। आप किस प्रकार की दवाएं लेकर आ रहे हैं? एसजी मेहता बोले, ‘पहले इस पर फैसला तो होने दीजिए’ इसके बाद बेंच ने एसजी मेहता से दिव्य फार्मेसी से जुड़ा पत्र पढ़ने को कहा।

➤ जस्टिस कोहली ने कहा, क्या विनियमन कानून से ऊपर है? आपको लगता है कि आपके पास हाई कोर्ट के आदेश के रूप में सुरक्षात्मक छत्रछाया थी?

➤ जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, 2 अधिनियम हैं। स्टे एक के संबंध में था। यह तो बस टिप है, मुझे 20 पॉइंट मिले हैं। अगर आप उत्तर देने में सक्षम नहीं हैं, तो आदेश देखें।

➤ जस्टिस कोहली ने पूछा, मिस्टर मेहता , जब उन्होंने आपको दिए गए बयान का उल्लंघन किया, तो आपने क्या किया? सरकार किसके इंतजार में बैठी रही। आपने हमारे उकसाने का इंतजार किया?

➤ जस्टिस अमानुल्लाह ने सीनियर वकील ध्रुव मेहता से कहा, हम आपको आज़ाद नहीं होने देंगे। सभी शिकायतें आपके पास भेज दी गईं। ध्यान रखें, हम हर बात पर जवाब चाहते हैं। जस्टिस अमानुल्लाह ने आगे कहा, सभी अधिकारियों को यहीं निलंबित क्यों नहीं किया जाना चाहिए?

➤ जस्टिस कोहली ने पूछा कि ड्रग ऑफिसर और लाइसेंसिंग ऑफिसर का क्या काम है? आपके अधिकारियों ने कुछ नहीं किया है। जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, हमें अधिकारियों के लिए ‘बोनाफाइड’ शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति है। हम हल्के में नहीं लेंगे।’

➤ जस्टिस कोहली ने राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकारी से कहा, हमें यह क्यों नहीं सोचना चाहिए कि आप कथित अवमाननाकर्ताओं के साथ मिले हुए हैं? आप जानबूझकर अपनी आंखें बंद रखे हुए हैं। विज्ञापन की सामग्री प्रकृति में विचारोत्तेजक है। ये सब आपकी नाक के नीचे हो रहा था। क्या आपको यह स्वीकार है? आयुर्वेद दवाओं का कारोबार करने वाली उनसे भी पुरानी कंपनियां हैं।

➤ वकील ध्रुव मेहता ने कहा, हमने स्वीकार नहीं किया। जस्टिस कोहली ने कहा, हमें उसके जवाब में अपना उत्तर दिखाएं। आपने फ़ाइल को इधर-उधर धकेलने के अलावा कुछ नहीं किया। भारत की जनता वैकल्पिक चिकित्सा के बारे में उतनी ही जागरूक है जितनी कि एलोपैथी के माध्यम से उपचार के बारे में। जस्टिस कोहली ने कहा, वे कहते हैं कि विज्ञापन का उद्देश्य लोगों को आयुर्वेदिक दवाओं से जोड़े रखना था, जैसे कि वे दुनिया में आयुर्वेदिक दवाएं लाने वाले पहले व्यक्ति हों।

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