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Wednesday, December 10, 2025
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‘जल-जंगल-जमीन छीनने के लिए आपको वनवासी कहती है BJP…’, झारखंड के सिमडेगा में बोले राहुल गांधी

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नई दिल्ली,

कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज झारखंड के सिमडेगा में एक चुनावी जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर तीखा हमला किया और कहा कि आज देश में दो विचारधाराओं की लड़ाई चल रही है. एक तरफ- INDIA गठबंधन. दूसरी तरफ- BJP और RSS.

राहुल ने कहा कि जहां INDIA गठबंधन के लोग संविधान की रक्षा कर रहे हैं, वहीं BJP-RSS संविधान को खत्म करना चाहते हैं. संविधान सिर्फ एक किताब नहीं है. इसमें बिरसा मुंडा जी, अंबेडकर जी, फुले जी और महात्मा गांधी जी की सोच है. ये संविधान देश के आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों, गरीबों की रक्षा करता है. इसलिए INDIA गठबंधन चाहती है कि देश को संविधान के माध्यम से चलाया जाए.

आदिवासी अफसर नहीं है सरकार में- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा, ‘देश में करीब 50% OBC, 15% दलित, 8% आदिवासी और 15% अल्पसंख्यक वर्ग के लोग हैं. ये आबादी कुल 90% है. लेकिन आपको देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के मैनेजमेंट में OBC, दलित और आदिवासी वर्ग का व्यक्ति नहीं मिलेगा. हिन्दुस्तान की सरकार को 90 अफसर चलाते हैं, देश के पूरे बजट का निर्णय यही अफसर लेते हैं.अगर इसमें से एक अफसर आदिवासी वर्ग का है, तो सरकार के 100 रुपए के खर्च में वो आदिवासी अफसर 10 पैसे का निर्णय लेता है.’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘हम आपको ‘आदिवासी’ कहते हैं, लेकिन BJP आपको ‘वनवासी’ कहती है.अंग्रेज भी आपको वनवासी कहते थे, तब बिरसा मुंडा जी आपके जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लड़े.आज हम भी आपके हक के लिए लड़ रहे हैं. BJP आपका जल-जंगल-जमीन छीनना चाहती है, इसलिए वह आपको वनवासी कहती है. आदिवासी का मतलब होता है- देश का पहला मालिक. वहीं वनवासी का मतलब है कि देश में आपका कोई अधिकार नहीं है. लेकिन आप आदिवासी हैं और देश पर सबसे पहला अधिकार आपका है.’

वनवासी शब्द को लेकर बीजेपी को घेरा
बीजेपी पर संविधान छीनने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘संविधान में आपको ‘वनवासी’ शब्द कहीं नहीं मिलेगा. जिन्होंने संविधान बनाया, उन्होंने भी वनवासी के बजाए ‘आदिवासी’ शब्द का प्रयोग किया. क्योंकि वे कहना चाहते थे कि जल, जंगल, जमीन के असली मालिक आदिवासी हैं. बिरसा मुंडा जी भी इसी जल, जंगल, जमीन के लिए लड़े थे. आज लड़ाई संविधान को बचाने की है.एक तरफ वो लोग हैं, जो आपको आदिवासी कहते हैं, आपका सम्मान करते हैं.दूसरी तरफ वे लोग हैं, जो आपको वनवासी कहते हैं और जो भी आपका है, वो छीनना चाहते हैं.’

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